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शनिवार, 18 जून 2016

सीबीआई व विजिलेंस टीम ने हिर्री माइंस डोलोमाइट खदान में एकसाथ मारा छापा

छत्तीसगढ़ 18 जून 2016 (अरमान हेथगेन). भिलाई स्टील प्लांट के हिर्री स्थित डोलोमाइट खदान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है। यहां करोड़ों रुपए के डोलोमाइट घोटाले की आशंका के चलते सीबीआई और स्टील प्लांट की विजिलेंस टीम ने एकसाथ छापामार कार्रवाई की। सुबह से लेकर देर शाम तक टीम खदान का नापजोख कर उत्पादन व परिवहन के अंतर की जानकारी जुटाती रही।

भिलाई स्टील प्लांट के लिए डोलोमाइट सप्लाई करने के लिए बड़ी खदान बिलासपुर से 20 किलोमीटर दूर हिर्री में है। 500 हेक्टेयर से भी अधिक इलाके में यहां बीएसपी डोलोमाइट का उत्खनन करती है। डोलोमाइट उत्खनन के बाद खदान से दाधापारा रेलवे साइडिंग और फिर वहां से वैगन के जरिए भिलाई स्टील प्लांट परिवहन किया जाता है। बताया गया कि करीब छह साल पहले हिर्री की खदान का एक मैनेजर आनन-फानन में नौकरी छोड़कर चला गया था। संदेह होने पर विजिलेंस की टीम ने जांच की तो मालूम हुआ कि स्टाक में लगभग बारह सौ करोड़ से भी अधिक की भारी अनियमितता है। इस बार भी बीएसपी की विजिलेंस टीम और सीबीआई को हिर्री माइंस के उत्पादन, स्टॉक और ट्रांसपोंटिंग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने का समाचार सलाम छत्तीसगढ़ द्वारा सीरीज़ में बनाया गया, इसको संज्ञान में लेते हुए यह छापामारी की कारवाई की गई। सीबीआई भिलाई व बीएसपी की विजिलेंस टीम ने हिर्री माइंस में छापामार कार्रवाई करने घुसे पूरे क्षेत्र में अफरा तफरी मच गई। जांच के दौरान टीम में शामिल अफसर पहले यहां ऑफिस पहुंचे और पदस्थ एजीएम को अपने साथ लेकर माइंस गए।
 
खदान में उत्पादन की जानकारी लेने के बाद अफसरों ने दाधापारा रेलवे साइडिंग का भी निरीक्षण किया। फिर अफसरों ने ऑफिस के रिकार्ड की जांच की। जांच के दौरान अफसरों ने खदान से निकले डोलोमाइट का नापजोख कराई। इसके बाद परिवहन किए गए डोलोमाइट की जानकारी जुटाई जा रही है। अफसरों ने बताया कि देर शाम तक उत्पादन के साथ ही स्टॉक पंजी व परिवहन किए गए डोलोमाइट का मिलान किया जाता रहा। लेकिन, अब तक वास्तविक आंकड़ा नहीं मिल सका है। संभावना बन रही है कि पुनः से भारी अनियमितता पकड़ में आएगी।
 
हालांकि प्रारंभिक जांच में अनियमितता सामने नहीं आई है। टीम की कार्रवाई तीन दिनों तक जारी रहेगी। जांच पूरी होने के बाद ही गड़बड़ियां व हेराफेरी सामने आ सकती है। हालांकि, सीबीआई के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में ही कुछ गड़बडियां सामने आई हैं। माइंस से निकाले गए डोलोमाइट व साइडिंग से प्लांट भेजे गए डोलोमाइट के स्टॉक में काफी अंतर मिला है। शिकायत के पुख्ता होने के बाद ही विजिलेंस की टीम ने जांच के लिए सीबीआई की मदद ली है। इस कार्रवाई में सीबीआई के डीएसपी एसएन शर्मा, निरीक्षक एके नंदा, अजय सिंह व सबइंस्पेक्टर मनीषा चंद्रा व बीएसपी के विजिलेंस अफसर सुनील गुप्ता समेत 12 सदस्यीय टीम मौजूद रहे।
   
अरबों की अनियमितता की आशंका -
बताया जा रहा है कि भिलाई स्टील प्लांट के अधीन हिर्री डोलोमाइट खदान से 1 माह में 1 लाख 10 हजार टन का ट्रांजिट लास दर्शाया गया है। माइंस में अप्रैल 2015 में 1 लाख 38 हजार टन डोलोमाइट का प्रोडक्शन दर्शाया गया और अगले माह स्टाक रजिस्टर में सिर्फ 28 हजार टन डोलोमाइट होना दर्ज किया गया है। महज 1 माह के अंतराल में 1 लाख 10 हजार टन डोलोमाइट की हेराफेरी पर सलाम छत्तीसगढ़ द्वारा प्रकाशित समाचार पर विजिलेंस व सीबीआई को जानकारी मिली है। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की जांच में करोड़ों रुपए का घोटाला उजागर होने की आशंका है।
 
जवाब देने से बचते रहे अफसर -
सीबीआई व बीएसपी की विजिलेंस टीम ने जब छापामार कार्रवाई की, तो माइंस में पदस्थ एजीएम के होश उड़ गए। जानकारी जुटाने व पूछताछ करने पर यहां के अफसरों को पसीना आ गया। लिहाजा, अधिकारी उन्हें दिग्भ्रमित कर गोलमोल जवाब देने की कोशिश करते रहे। जांच में कई ऐसे तथ्य मिले हैं, जो सीबीआई अफसरों के गले नहीं उतर रहा है। अफसर कल से आज तक खदान की नापजोख कर उत्पादित डोलामाइट के साथ ही स्टाक पंजी व परिवहन किए गए डोलोमाइट का रिकार्ड खंगालते रहे।
  
फर्जी नाइट शिफ्ट और करोड़ों का भुगतान -
सीबीआई द्वारा यह भी जानकारी दी गई कि बीएसपी की विजिलेंस टीम व सीबीआई को हिर्री माइंस में नाइट शिफ्ट के नाम पर करोड़ों रूपये फर्जी भुगतान करने के भी दस्तावेजों को खंगालने में जुटी रही। टीम इस संबंध में अन्यत्र तरीकों से भी जानकारी जुटाने में लगी है।
 
सीआईएसएफ द्वारा सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल -
हिर्री माइंस व डोलोमाइट की उत्पादन व परिवहन की निगरानी सहित परिसर की सुरक्षा के लिए यहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन, उनकी कड़ी पहरेदारी के बीच इतनी बड़ी अनियमितता हो रही है और पूर्व में भी ऐसी अनियमितता हो चुकी है। वहीं सीआईएसएफ द्वारा कहा गया कि सुरक्षा के लिए मौजूद अफसरों को इसकी भनक तक नहीं लगी। ऐसे में औद्योगिक सुरक्षा बल की भूमिका पर भी अब सवाल उठना स्वाभाविक है। मालूम हो कि माइंस परिसर की सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ की मौजूदगी में अन्य लोगों की बेधड़क आवाजाही होती है और वहीं टीम कार्रवाई करने पहुंची तो मीडियाकर्मियों को रोककर अपनी जिम्मेदारी जताने की कोशिश करते रहे।
  
सीआईएसएफ ने मीडिया को रोका -
बीएसपी व सीबीआई की टीम जब छापा मारने पहुंची तो मीडियाकर्मी भी हिर्री माइंस पहुंच गए। यहां ऑफिस में माइंस के अधिकारी-कर्मचारियों ने पहले मीडियाकर्मियों को रोकने की कोशिश की। फिर मीडियाकर्मी सीबीआई की टीम के साथ खदान पहुंच गए तो यहां भी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के अफसरों ने रोकने की कोशिश की। सीआईएसएफ की टीम ने यहां मीडियाकर्मियों को कवरेज करने से रोक दिया। उनका कहना था कि माइंस परिसर व अंदर में मीडिया का प्रवेश प्रतिबंधित है।
 
मगर जब रायपुर के पत्रकार जावेद अख्तर द्वारा पूर्व की अनियमितता व वर्तमान में भी अनियमितता हो जाने पर सीआईएसएफ की सुरक्षा व कार्य प्रणाली पर प्रश्न दागना शुरू किया, वो फोटोग्राफ्स दिखाए तो सभी अधिकारी बगले झांकने लगे। सीबीआई व विजिलेंस टीम के सामने अफसरों द्वारा जवाब न दे पाने पर मजबूरन छापामारी टीम के अधिकारियों को ही बोलना पड़ गया और मीडिया कर्मियों को आने की अनुमति दी गई।

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