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शनिवार, 2 अप्रैल 2016

भारत माता की जय - फतवे पर बोलीं साध्वी निरंजन ज्योति, यह शहीदों का अपमान

नई दिल्‍ली 02 अप्रैल 2016 (IMNB). भारत माता की जय के नारे पर दारुल उलूम के जारी किए गए फतवे पर केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा कि वह इस फतवे की निंदा करती हैं। उन्होंने कहा कि यह फतवा शहीदों का अपमान है। जिस देश में रहते हैं उसके बारे में जयकार करने में क्या समस्या है। उन्होंने कहा कि 'भारत माता की जय' का नारा न लगाना देश को बांटने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि हम पाकिस्तान में नहीं रह रहे हैं। 
वंदेमातरम के बाद अब दारुल उलूम ने गुरुवार को भारत माता की जय के नारे को भी इस्लाम के खिलाफ बताते हुए इसे मुस्लिमों को लगाने के लिए मना कर दिया। संस्था के मुफ्ती-ए-कराम ने दिए अपने फतवे में कहा कि मुस्लमान अल्लाह के सिवा किसी की भी परस्तिश (इबादत) नहीं कर सकते। इस नारे का मफहून (सारांश) पूजा से मालूम होता है इसलिए यह शिर्क (निषेध) है। आरएसएस प्रमुख द्वारा स्कूलों में भारत माता की जय के नारे लगवाने को लेकर दारुल उलूम के मुफ्तियों के पास हजारों की तादाद में सवाल आए। देशभर से लोगों ने पूछा कि क्या मुसलमान भारत माता की जय के नारे लगा सकता है? दारुल उलूम के मुफ्ती-ए-कराम की ज्यूरी में शामिल मुफ्ती-ए-आजम मौलाना मुफ्ती हबीबुर्रहमान, मुफ्ती महमूदुल हसन बुलंदशहरी और मुफ्ती वकार समेत अन्य मुफ्ती-ए-कराम ने कहा कि इससे पूर्व वंदेमातरम को लेकर विवाद खड़ा किया गया था।
उन्होंने कहा कि अगर ‘भारत माता की जय’ को स्कूलों में मुस्लिम बच्चों को नारे लगाने के लिए लागू किया जा रहा है तो मुसलमानों को इस नारे से स्वयं को अलग कर लेना चाहिए। मुफ्ती-ए-कराम ने कहा कि बिला शुबाह (नि:संदेह) भारत हमारा वतन है और हमारे बाब-ओ-अजदाज (पूर्वज) यहीं पैदा हुए हैं और हम औरों की तरह ही मुल्क से मोहब्बत करते हैं। मगर वतन को अपना माबूद (देवी-देवता) नहीं मान सकते। यानी कि मुल्क की पूजा नहीं कर सकते। उन्होंने फतवे में साफ कहा कि मुसलमान एक खुदा में यकीन रखने वाला और खुदा के सिवा किसी दूसरे की परस्तिश नहीं कर सकता। जबकि इस नारे में हिन्दुस्तान को देवी अकीदा समझा गया है जो कि इस्लाम मजहब के मानने वालों के लिए शिर्क है। मुफ्ती-ए-कराम ने फतवे में दो टूक कहा कि हिन्दुस्तान के कानून में प्रत्येक नागरिक को अपने मजहब और उसके अकीदे को मानने का हक है इसलिए कोई कानून के खिलाफ किसी काम के लिए मजबूर ना करें।

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