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बुधवार, 24 फ़रवरी 2016

शाहजहाँपुर - शहर में खूब फल-फूल रहा नकली खाद्य तेल का धंधा

शाहजहाँपुर 24 फरवरी 2016 (ब्‍यूरो रिपोर्ट). यदि आप पीले रंग के किसी भी तेल को शुद्ध सरसों का तेल समझकर खरीदते आ रहे हैं तो यह खबर आपके लिए ही है। इस समय बाजार में नकली सरसों का तेल धड़ल्ले से बिक रहा है। असली सरसों के तेल की तरह से ही एकदम पीले और चमकीले रंग का यह मिलावटी तेल बाकायदा ब्रांडे्ड कंपनी की बोतल और टीन में रैपर लगाकर उपलब्ध है। तेल माफिया सरसों के तेल में मिलावट करके लाखों में खेल रहे हैं और जनता के स्वास्थ्य से सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार अफसरों की हीलाहवाली के चलते इन तेल माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। नकली तेल के इस खेल में इन माफियाओं को एक व्यापार मंडल के व्यापारी नेताओं का खुला संरक्षण प्राप्त है। जिले में इस समय खाद्य तेल का काला कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। सरसों के तेल में मिलावटखोरी कर तेल माफिया लाखों में खेल रहे हैं। शहर से लेकर गाँव-दिहात में सरसों के तेल में सस्ता तेल मिलाकर सरसों के दामों पर बेचा जा रहा है। शुद्ध सरसों के तेल से आधी कीमत पर ही उपलब्‍ध पॉमआयल व राइस ब्रान (चावल के छिलके से तैयार तेल) मिलाकर कई गुना अधिक तक कमाई की जा रही है। शुद्ध सरसों के पीले रंग के लिए खतरनाक केमिकल का प्रयोग कर माफिया जनता के स्वास्थ्य से जमकर खिलवाड़ कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जिले में गुपचुप तरीके से भारी मात्रा में पॉम ऑयल व राइस ब्रान तेल गैर जनपदों से बाहर से मंगाया जा रहा है।

जिले में विभिन्न स्थानों पर लगी इन अवैध तेल फैक्ट्रियों में दोगुने से तीन गुना तक की मात्रा में पॉम आयल व राइस ब्रान मिलाया जा रहा है। इसके बाद बाकायदा ब्रांडेड कंपनी की बोतल व टीन में भरकर इसे मार्किट में सप्लाई कर दिया जाता है। अधिक मुनाफे के चक्कर फुटकर विक्रेता इस तेल की बिक्री कर रहे हैं। अनजान उपभोक्ता इस तेल को खरीदकर बेवजह ही विभिन्न गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, जबकि माफिया लाखों में खेल रहे हैं। अफसरों की हीलाहवाली के चलते तेल माफिया जिले के साथ-साथ पड़ोसी जनपदों तक यह नकली तेल तैयार कर सप्लाई कर रहे हैं।

ऐसे बन रहा मिलावटी तेल -
पॉम ऑयल व राइस ब्रान की मिलावट कर माफिया तगड़ा मुनाफा कमा रहे हैं। बाजार में पॉम ऑयल का तेल 50 से 55 रुपये प्रति लीटर है, जबकि राइस ब्रान 40 से 45 रुपये प्रति लीटर है। मिलावटखोर राइस ब्रान या पॉम ऑयल में आधा से एक तिहाई तक सरसों का तेल मिलाते हैं। इन तेलों में खुशबू नहीं होती है। इसलिए सरसों के तेल की ही खुशबू देने लगता है। सरसों के पीले तेल की तरह ही दिखने के लिए इसमें एक पीला केमिकल युक्त रंग मिलाया जाता है। इसके बाद तेल को मार्केट में सप्लाई कर दिया जा रहा है।

प्रति टीन 600 तक का मुनाफा -
मार्केट में असली सरसों का तेल 85 से 90 रुपये लीटर तक बिक रहा है। सरसों के तेल में मिलावट के बाद इसे बाजार में असली तेलों के भाव में ही बेचा जा रहा है। बाकायदा ब्रांडेड कंपनियों के रैपर लगाकर टीन व बोतल धड़ल्ले से बिक रही है। मिलावटखोर प्रति टीन पर 600 रुपये तक का मुनाफा कमा रहे हैं।

व्यापार मंडल का है संरक्षण -
शहर में चल रहीं नकली सरसों के तेल की फैक्ट्रियों को एक व्यापार मंडल का खुला संरक्षण प्राप्त है। जब भी कोई अफसर इन फैक्ट्रियों में छापा मारने जाता है तो इस व्यापार मंडल के व्यापारी नेता अफसर से भिड़ जाते हैं या फिर आर्थिक समझौता कर कार्रवाई को दबा देते हैं।

कार्रवाई नही करता खाद्य विभाग -
नगर में चल रहीं नकली खाद्य तेल की फैक्ट्रियों में छापा मार कार्रवाई के लिए खाद्य विभाग कोई प्रयास नहीं करता है। पिछले लम्बे समय से विभाग की ओर से ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्रों की माने तो खाद्य विभाग के अफसरों के पास इन फैक्ट्रियों से ''महीना'' पहुँचता रहता है जिसके चलते कार्रवाई के नाम पर सब कान में तेल डाले बैठे हैं।

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