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सोमवार, 4 जनवरी 2016

छत्तीसगढ़ - टेपकांड में नए खुलासे से सब पर लगेगा अभियोग, अधिकारियों ने किया था नाम वापसी में सहयोग

छत्तीसगढ़ 4 जनवरी 2016 (छत्तीसगढ़ ब्यूरो). रायपुर के कथित टेप-कांड में आए दिन नये नये खुलासे हो रहे हैं और बयानबाजी का माहौल भी पूरी तरह गरम है। ऐसे में नये खुलासे से राजनीतिक गलियारे में आग लग जाएगी क्योंकि उच्च प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक नामांकन वापसी में अधिकारियों ने चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन करते हुए मंतूराम पवार का सहयोग किया था और समय सीमा समाप्ति के बाद भी लगभग 10 मिनट अतिरिक्त समय दिया गया।
 जानकारी के अनुसार मन्तूराम पवार ने 3:10 बजे को नामांकन से अपना वापस लिया था जबकि नामांकन वापसी का समय 3:00 बजे तक ही सीमित था। इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग के नियमों की अनदेखी करते हुए राजनैतिक लाभ के चलते ही अधिकारियों ने उल्लंघन किया होगा। पिछले साल कांकेर जिले के अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में मुख्यमंत्री रमन सिंह के परिजन और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बीच लेनदेन के कुछ कथित टेप सार्वजनिक होने के बाद हंगामा मचा हुआ है। इसी दौरान इस उपचुनाव को लेकर अब एक नया पेंच सामने आ गया है।उच्च प्रशासनिक हल्कों की माने तो मंतूराम पवार ने नामांकन वापस अंतिम समय निकल जाने के बाद लिया था। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि अफसरों ने चुनाव आयोग के नियमों के परे जाकर  मंतूराम को सहयोग किया था।

विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मंतूराम पवार नामांकन वापसी दिवस कांकेर में 11:30 बजे से ही मौजूद थे। कथित लेनदेन के निपटारे के बाद तकरीबन 1:30 बजे कलेक्टोरेट परिसर में दाखिल हुये और तब से लेकर नामांकन वापसी के पूर्व तक रिटर्निंग अफसर के कक्ष में ही बैठे रहे थे। जिसकी पुष्टि चुनाव आयोग के वीडियो से की जा सकती है। एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, इस दौरान वे बेहद अनिर्णय की स्थिती में थे, इसके चलते नामांकन वापसी के समय थोड़ा विलम्ब हो गया था। ज्ञात हो नामांकन वापसी के लिये अंतिम दिवस 3:00 बजे का समय निर्धारित था जब मंतूराम पवार नामांकन वापस ले रहे थे तब घड़ी में 3 बजकर 10 मिनट हुआ था। समय निकल जाने के उपरान्त नियमानुसार नामांकन वापस नहीं लिया जा सकता था मगर समय सीमा समाप्ति के बाद भी रिटर्निंग अफसर ने उनका नाम वापस ले लिया। 

जब आयोग के उक्त नियम का उल्लंघन हो रहा था तब मौके पर उपस्थित एक चुनावी ड्यूटीरत कनिष्ठ अफसर की नजर दीवार पर टंगी घड़ी पर पड़ी तो उन्होंने रिटर्निंग ऑफिसर का ध्यान आकर्षित कराया था और तत्काल प्रभाव से घड़ी के कांटे को पीछे तक कराया गया था, इस बात की भी तस्दीक चुनाव आयोग द्वारा कराई विडियो रिकॉर्डिंग से की जा सकती है। चाहे तो केंद्रीय चुनाव आयोग, नामांकन वापसी की विडियो रिकॉर्डिंग की जांच कर सकता है। यह भी जानकारी मिली है की वीडियो रिकार्डिंग से भी छेड़छाड़ की गयी है, जिसकी जांच बारीकी से व एक्सपर्ट से कराने पर पुष्टि की जा सकती है। कि छेड़छाड़ हुई या नहीं? बहरहाल यह सभी जाँच का विषय है और संभवतः चुनाव आयोग इन सभी बातों पर विशेष तौर से ध्यान देगा।ज्ञात हो कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव विवेक ढाँड से एक सप्ताह के भीतर अंतागढ़ उपचुनाव की रिपोर्ट तलब की गई है, यदि मुख्य सचिव विवेक ढांड इस मसले को अपनी रिपोर्ट में लेते है तो राजनैतिक दलों के लेनदेन के आलावा बड़े स्तर के प्रशासनिक घालमेल भी सामने आ सकता है, लेकिन ऐसा होने के आसार कम ही है।

ज्ञात हो पिछले साल 13 सितंबर को अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र के लिए उपचुनाव हुआ था जिसमें 13 उम्मीदवार मैदान में थे लेकिन नाम वापसी के अंतिम दिन कांग्रेस के उम्मीदवार मंतूराम पवार ने ऐन एकदम आखिरी समय में नामांकन वापस ले लिया था। हालांकि उस समय भी इस बात पर अच्छी खासी बहस छिड़ गई थी। कांग्रेस के ही एक गुट ने उस समय नामांकन वापसी के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का हाथ होने की आशंका जाहिर की थी, क्योंकि मंतूराम पवार जोगी गुट के थे, इसके पूर्व भाजपा के चुनावी मैनेजरों ने निर्विरोध चुनाव जिताने की कोशिश की थी इसके तहत एक-एक करके 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान से हट गए थे।सबसे बड़ा सवाल यह भी पैदा होता है कि आखिरकार नाम वापसी के कुछ महीने पश्चात ही मंतूराम पवार ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। ऐसे ही कई अनसुलझे सवाल आज भी जिंदा हैं जिनका जवाब नहीं मिल सका था। इस टेप के बाहर आने के बाद से ही संभावनाएं प्रबल हो गई कि कांग्रेस के दूसरे गुट ने जोगी गुट पर जो आशंका व्यक्त की थी, शायद कुछ न कुछ सच्चाई अवश्य रही होगी? हालांकि इसका निर्णय चुनाव आयोग को करना है और 7 जनवरी के बाद परिणाम ऐसा भी आ सकता है जो कि सरकार की कुर्सी को ही ले डूबे या दो चार नेताओं की लुटिया ही डूबा दे? फिलहाल मीडिया ने इस मामले पर प्रदेश सहित देश की जनता का भी ध्यान आकर्षित कर दिया है जिसके चलते वाकई यह मामला अतिसंवेदनशील की श्रेणी में शामिल हो चुका है। पूरा देश इसका सच जानने के लिए उत्सुक है।

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