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मंगलवार, 22 दिसंबर 2015

पुलिस-प्रशासन ही बिगाड़ रहा है कन्नौज-छिबरामऊ का माहौल

कानपुर 22 दिसम्‍बर 2015 (अभिषेक त्रिपाठी). जिला कन्नौज में पिछले दिनों हुये बवाल और सांप्रदायिक तनाव की विवेचना के बाद साफ तौर पर स्थानीय पुलिस-प्रशासन की अदूरदर्शिता और असावधानी सामने आई है। इस बात की तस्दीक खुद कानपुर जोन के शीर्ष पुलिस अधिकारियों ने की थी। उस घटनाक्रम से भी कन्नौज प्रशासन ने सबक नहीं लिया और जिले के छिबरामऊ कस्बे में फिर से वही हरकत दोहराई गई। इस बार तो छिबरामऊ तहसील प्रशासन ने अमर उजाला ग्रुप के दैनिक सांध्य अखबार डीएलए के छिबरामऊ रिपोर्टर पंकज द्विवेदी के कंधे पर रखकर ‘बंदूक’ चलाने का प्रयास किया।

एक बार फिर से इस प्रयास का नतीजा कन्नौज सिटी वाले ही हालात बना सकता था। लेकिन अपनी जिम्मेदारी का अहसास रखने वाले जिला कन्नौज के पत्रकारों, खासकर पत्रकारों के संगठन, आॅल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन ‘‘आईरा’’ व आईजी कानपुर जोन के प्रयासों से हालात बिगड़ते बचे। पर छिबरामऊ पुलिस-प्रशासन के ‘‘अंधे कानून’’ के कारण अभी भी पत्रकारों, व्यापारियों व कन्नौज जिला की जनता में आक्रोश व्याप्त है। मामले की सही जांच होकर असल आरोपियों और दोषियों को सजा मिलने पर ही जो शांत हो सकेगी। 

ये है पूरा मामला, दिखी पुलिस की ‘विवेकहीनता’

दो दिन पूर्व समाचार संकलन के दौरान छिबरामऊ बाजार में सुबह डीएलए के रिपोर्टर पंकज द्विवेदी और कुछ युवकों की बाइक में टक्कर हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार आवारा किस्म के इन युवकों ने मुहांचाही के बाद अपने साथियों को बुलाकर पंकज पर हमला कर दिया। रिपोर्टर को ना सिर्फ घेर कर बुरी तरह पीटा गया, बल्कि अराजक तत्वों ने उसकी बाइक को भी तोड़फोड़ कर आग लगा डाली। बताया गया कि इस बवाल के दौरान सूचना पर भी तुरंत पुलिस नहीं पहुंची। फिर बाद में डीएम-एसएसपी सहित पुलिस पहुंची और पत्रकार को ही थाने लेजाकर बैठा लिया गया। हमलावर युवकों को कथित तौर पर कुछ नेताओं द्वारा संरक्षण प्राप्त इन अराजक युवाओं के विरोध में, और जनता के बीच लोकप्रिय पत्रकार पर हमले के विरोध में व्यापारियों ने बाजार बंद कर दिया। पुलिस की ढिलाई देखकर आक्रोशित पब्लिक ने नारेबाजी कर दी। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार आरोपियों पर फौरी कार्रवाई या गिरफ्तारी के बजाये थाने में पीडि़त पत्रकार से सुबह से देर रात तक डीएम-एसपी समेत बारी-बारी से अधिकारियों ने पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कार्रवाई का भय दिखाकर पत्रकार पर लगातार आरोपियों से सुलह करने का दबाव बनाया गया। पत्रकार की तहरीर ले लेने के बावजूद पुलिस ने देर रात तक मुकदमा दर्ज नहीं किया था। इस बीच जैसे ही जानकारी हुई कि पत्रकार पंकज द्विवेदी पर हमला करने वाले युवक दूसरे संप्रदाय के हैं, अचानक एक राजनैतिक दल ‘मुद्दे को कैश कराने’ के लिये पत्रकार के समर्थन में कूद पड़ा। इस राजनैतिक दल की स्थानीय नेता और सूबे के पूर्व कैबिनेट मंत्री रामप्रकाश त्रिपाठी की सुपुत्री अर्चना पांडे सहित पार्टी के कई नेता सड़क पर उतर आये। इससे हालात अचानक ही कन्नौज सिटी जैसे दिखने लगे। कुल मिलाकर नेताओं को ये मौका पुलिसिया शिथिलता के कारण ही मिला।

नेताओं के साथ पीडि़त पत्रकार को भी लपेटा

पुलिस अधिकारी बाजार में व्यापारियों से बंदी निरस्त करने और प्रदर्शन नहीं करने की अपील करते रहे। बात नहीं बनने पर शाम को खबर आई कि पुलिस ने बीच में कूद पड़ी पाॅलिटिकल पार्टी के आधा दर्जन नेताओं समेत पीडि़त पत्रकार और कुछ अन्य अज्ञात पत्रकारों पर ही मारपीट, तोड़फोड़, धार्मिक उन्माद भड़काने और बलवे आदि की धाराओं में नामजद रिपोर्ट दर्ज कर ली है। वहीं आरोपी युवक खुले घूम रहे हैं। इससे व्यापारियों, पत्रकारों और पब्लिक में आक्रोश बढ़ने लगा। इतने पर पर भी छिबरामऊ तहसील का पुलिस-प्रशासन अदूरदर्शिता दिखाने से बाज नहीं आया और मामले में पैरवी कर रहे पत्रकारों को एक पुलिसकर्मी से चेतावनी रूपी धमकी भिजवाई गई कि वो शांत बैठ जायें, वर्ना उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर दिया जायेगा। आॅल इंडिया रिपोर्टर्स एसोसिएशन ‘‘आईरा’’ के छिबरामऊ अध्यक्ष अभय और आईरा-कन्नौज के जिलाध्यक्ष अवनीश तिवारी सहित कई शीर्ष पत्रकारों ने जिले के शीर्ष पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से दी कई इस ‘धमकी’ की पुष्टि की।

और फिर AIRA ने टेकओवर किया मसला

उधर कन्नौज व छिबराऊ की आईरा इकाई की मदद के लिये संगठन की प्रदेश और राष्ट्रीय इकाई एक्टिव हो गई। प्रदेश सदस्यता प्रमुख अभिषेक त्रिपाठी के नेतृत्व में कानपुर में आई जोन आशुतोष पांडे और डीआईजी नीलाब्जो चैधरी से मिलने संडे की भारी संख्या में आईरा के पदाधिकारी पहुंचे। उन्होंने दोनों अधिकारिेयों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर छिबरामऊ में प्त्रकार के उत्पीड़न के मसले की जांच एएसपी स्तर के अधिकारी से कराने की मांग की। 

पीएमओ ने सीएम कार्यालय को भेजा आदेश

आईरा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एडवोकेट पुनीत निगम ने प्रधानमंत्री कार्यालय से संपर्क करके छिबरामऊ मामले में दखल देने एवं सही जांच कराने की मांग की। इस पर संडे की दोहर को पीएमओ से यूपी के मुख्यमंत्री सचिवालय को लिखित आदेश व ईमेल से जांच व कार्रवाई का आदेश दे दिया गया। इसके पूर्ण डिटेल प्रधानमंत्री कार्यालय से आईरा कार्यालय को भी प्रेषित किये गये हैं। 

इसलिये छिबरामऊ पुलिस, कन्नौज प्रशासन है कटघरे में

उधर आईजी और डीजाईजी रेंज कार्यालय से भी छिबरामऊ मामले की जांच-पड़ताल चालू की जा चुकी है। प्रथम दृष्टया स्थानीय पुलिस अधिकारी कटघरे में दिख रहे हैं। संडे को छिबराऊ पुलिस द्वारा आईजी कार्यालय को जो सूचना दी गई, उसके मुताबिक पहले पीडि़त पत्रकार की ही तरफ से 17 आरोपियों के खिलाफ नामजद एफआईआर की गई। लेकिन उसपर जांच करके गिरफ्तारिया करने के बजाये पुलिस ने पत्रकार पर हमले के आरोपियों की तरफ से भी पीडि़त पत्रकार के खिलाफ ही आधा दर्जन धाराओं में दो मुकदमे लिख लिये। आरोप है कि पीडि़त पत्रकार को 30 घंटे से ज्यादा थाने और एसडीएम आॅफिस में गिरफ्तार करके बैठाये रखा गया। तब जाकर जमानत पर छोड़ा गया। 

भारी संख्या में पूर प्रदेश के पत्रकारों की और जनता की निगाहें छिबरामऊ कांड की तरफ हैं, जहां एक बार फिर से प्रदेश पुलिस की घोर लापरवाही और अदूरदर्शिता उजागर होने की संभावना है। पब्लिक नाराज है कि पुलिस-प्रशासन जब पत्रकारों को इस तरह फंसा सकता है, तो आम पब्लिक के साथ कैसा सलूक होगा।

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