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गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

अभिषेक मिश्रा हत्याकांड - दफ्न कब्र से बाहर आए राज़, पुलिस ने सुलझाई हत्या की गुत्थी

छत्तीसगढ़ 24 दिसंबर 2015(जावेद अख्तर). रायपुर। भिलाई में श्री शंकराचार्य शिक्षा समूह के डायरेक्टर अभिषेक मिश्रा की लाश एक मकान में दफ्न होने के खुलासे के बाद अपहरण कांड का आज पटाक्षेप हो गया। भिलाई के कारोबारी घराने से जुड़ा यह मामला पूरी तरह से फिल्मी रहा। किसी मर्डर मिस्ट्री फिल्म की तरह ही इसमें भी राज को दफ्न करने के लिए लाश दफ्न की गई, लेकिन ऐसा हो न सका।

बीते कई दिनों से अभिषेक मिश्रा केस चर्चा का विषय बना रहा। मगर जब खुलासा हुआ तब असलियत सबके सामने आई कि केस की हकीकत क्या थी। यह केस भी बेहद पेंचीदा और घुमावदार रहा। हालांकि यह सच ही कहा गया है कि पराई नारी पर नजर मत डालो, बुरी आदत है इसको बदल डालो। मगर 90 फीसदी अवैध संबंधों के मामले में परिणाम ऐसा ही दर्दनाक प्राप्त होता है। फिर भी जाने क्यों लोग इन अवैध संबंधों के चक्कर में पड़ते हैं और अपनी जान गंवा बैठते हैं।
        
फिल्मी कहानी
फिल्म दृश्यम की कहानी, अभिषेक मिश्रा हत्याकांड से काफी हद तक मिलती जुलती है। इसमें अनजाने में हुए कत्ल के बाद लाश को कब्र में गाड़ दिया जाता है। पुलिस जब जांच करती है तो वह एक-एक सूत्र करते हुए दफ्न के किस्से तक पहुंच जाती है, लेकिन अपराधी एक कदम आगे जाकर कब्र से शव हटा देता है और वहां कुत्ते की लाश गाड़ दी जाती है। ऐसे में पुलिस को कब्र से कुछ सुबूत हाथ नहीं लगते।
  
अभिषेक मामले की कहानी
अभिषेक की हत्या कॉलेज में कार्यरत पूर्व महिलाकर्मी के साथ अवैध संबंधों के चलते महिला के पति ने की थी। इसमें भी फिल्म दृश्यम की तरह कब्र में शव को दफ्न कर दिया गया और गुमराह करने के लिए मृतक की कार राजधानी के वीआईपी रोड पर लावारिस छोड़ दी गई। फर्क सिर्फ इतना था कि इसमें शव कब्र के अंदर ही मिल गया।
     
पुलिस हुई भ्रमित
शंकरा समूह के डायरेक्टर अभिषेक मिश्रा की गुमशुदगी की गुत्थी सुलझने की कगार पर पहुंच गई थी कि एकाएक बलौदाबाजार में मिले शव के आधार पर पुलिस मामले में कन्फ्यूज हो गई थी। डीएनए टेस्ट होने के बाद पुष्टि हुई कि यह अभिषेक की लाश नहीं है।
 
एसआईटी की कमान दुर्ग एसपी को दी गई
एसआईटी का नेतृत्व दुर्ग एसपी मयंक श्रीवास्तव के हाथ सौंपी गई। इनके अलावा रायपुर क्राइम एएसपी अजात बहादुर शत्रु, जांजगीर-चांपा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल, रायपुर पुरानी बस्ती सीएसपी राजीव शर्मा, टीआई संजय सिंह, टीआई कलीम खान शामिल रहे। आईजी प्रदीप गुप्ता शुरू से ही पूरे मामले की मानिटरिंग खुद कर रहे थे कि अचानक इस प्रकरण में एसआईटी का गठन कर दिया गया। ऐसे में माना जा रहा था कि पुलिस अभिषेक के अपहरण को लेकर जिन पर संदेह रखती है, उनसे सख्ती से पूछताछ की जाएगी। पुलिस के अधिकारी स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) गठन की बात तो स्वीकार करते रहे, लेकिन मामले की पुष्टि नहीं की थी। तो वहीं पुलिस ने 28 टीमों को 8 अलग अलग राज्यों में अभिषेक की तलाश करने के लिए भेजा गया। जिसमें से देढ़ दर्जन भर टीम तो सड़क मार्ग से गई थी। इसमें से कुछ टीम लौट आई मगर कुछ भी हाथ नहीं आया था।
  
आखिरी लोकेशन पचपेड़ी नाका में मिली थी
मोबाइल में सिम मध्यप्रदेश से फर्जी दस्तावेज से लिया गया था। रायपुर के बाहर जाते-जाते लोकेशन पचपेड़ी नाका के आसपास जाकर बंद हो गई। इसके बाद से पुलिस को कोई लोकेशन नहीं मिली थी और न ही पुलिस के हाथ उस मोबाइल या सिम का दुकानदार लगा था, जिससे फोन किया गया था।

शक में भिलाई व्यवसायी समेत तीन हिरासत में
पुलिस मंगलवार देर रात तक इस प्रकरण के तार से तार जोड़ने में लगी थी। इस प्रकरण को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया था। इसके बाद काल डिटेल के आधार पर इस मामले में भिलाई के युवा व्यवसायी समेत तीन आरोपियों को हिरासत में लिया गया व शुरुआती पूछताछ में अवैध संबंधों की बात सामने आई थी मगर कोई प्रमाण नहीं मिला। इनसे भिलाई क्राइम ब्रांच में पूछताछ की गई थी।
     
साइबर व काल डिटेल से केस गया पलट
बेंगलुरू से साइबर विशेषज्ञ को बुलवाया गया व इसके अलावा प्रदेश के साइबर विशेषज्ञ भी पड़ताल में लगाए गए थे। यहीं से तार जुड़ने शुरू हुए और जिसके बाद से कई गुत्थियां सुलझने लगी। काल डिटेल खंगालने पर विकास जैन का मोबाइल उन्हीं प्वाइंट व लोकेशन पर पाया गया, जहां पर अभिषेक की हत्या के पहले व फोन आफ होने तक के प्वाइंट व लोकेशन पर था। इसी को आधार बनाकर पुलिस ने विकास जैन को उठाया और फिर विकास जैन ने हत्या कांड का सच बताया। आखिरकार पुलिस हत्यारों तक पहुंचने में सफल रही।
    
क्या हुआ था उस रात
- 9 नवंबर को अभिषेक दिल्ली से वापस लौटा था।
- विकास ने अपने प्लान के मुताबिक अभिषेक को अपने दोस्त विजय के घर स्मृति नगर बुलाया।
- घर वालों को कुछ बताए बिना अभिषेक शाम को घर से बाहर चला गया।
- विजय के घर पर विकास और उसके चाचा पहले से पहुंचे हुए थे।
- शाम करीब 6-7 बजे अभिषेक वहां पहुंचा, उसके आते ही विकास ने अभिषेक के सिर पर किसी भारी चीज से वार कर दिया।
- इसके बाद उसके सिर और शरीर के दूसरे हिस्सों पर धारदार हथियार से कई वार किए।
- जब अभिषेक की सांस टूट गई तो आरोपियों ने उसकी लाश को एक बड़े पॉलीथीन में भर दिया।
- इसके बाद आंगन में करीब छ: फीट गड्ढा कर उसकी लाश को वहीं दफना दिया।
- फिर आरोपी उसकी कार को लेकर रायपुर गए, कुम्हारी टोल प्लाजा में लगे सीसीटीवी कैमरे में कार दिख भी रही है लेकिन क्लियर नहीं होने की वजह से उसमें बैठे लोगों का चेहरा साफ नहीं दिख रहा है।
- इसके बाद कार को रायपुर एयरपोर्ट रोड पर लावारिस हालत में छोड़ कर आरोपी वहां से भाग निकले।
    
मामले में कब क्या हुआ
- 9 नवंबर की देर रात अभिषेक की कार लावारिस हालत में रायपुर में मिली।
- उसका फ़ोन लगातार बंद आ रहा था।
- अपहरण की आशंका से पुलिस ने रायपुर-दुर्ग जिलों में अभिषेक की तलाश शुरू की। राज्य के सभी एग्जिट पॉइंट्स पर नाकेबंदी कर जांच की गई लेकिन अभिषेक का कुछ पता नहीं चला।
- अभिषेक की तलाश के लिए पुलिस की टीम दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार और बैंगलोर भेजी गई, लेकिन सभी जगह असफलता ही हाथ लगी
- अभिषेक के परिजनों को फिरौती के लिए एक भी फ़ोन नहीं किया गया था, इससे पुलिस को हत्या का शक पहले से था।
- 18 नवंबर को बलौदाबाजार जिले में एक युवक की सिरकटी लाश मिली थी, पुलिस ने उस लाश का सैंपल डीएनए टेस्ट के लिए भेजा। इस बीच पता चला कि वह लाश बलौदाबाजार के ही एक युवक की थी।
- पुलिस लगातार अभिषेक के गायब होने से पहले के कॉल डिटेल्स चेक कर रही थी।
- इस मामले में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी संज्ञान लिया था और पुलिस को दिशा निर्देश दिए थे।
- 22 दिसंबर को दुर्ग पुलिस ने कॉल डिटेल्स के आंकलन के आधार पर विकास जैन और अन्य को गिरफ्तार किया।
- 22 दिसंबर की शाम ही गृह मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए दुर्ग-रायपुर जिलों के पुलिस की एसआईटी गठित की थी।
- 22 दिसंबर की देर रात विकास जैन टूट गया और उसने पूरी घटना का खुलासा पुलिस के सामने कर दिया।
- 23 दिसंबर की सुबह अभिषेक की लाश विजय कुमार के घर के आंगन से निकाली गई।
 
प्रेमिका के पति ने हत्या कर शव घर में दफनाया
भिलाई के शिक्षा कारोबारी अभिषेक मिश्रा अपहरण मामले का खुलासा भी बेहद पेंचीदा रहा, कारोबारी की हत्या उसी के कॉलेज की एक टीचर के पति ने की थी। अभिषेक और शिक्षिका के बीच अफेयर चल रहा था। टीचर के पति को यह बात नागवार गुजरी और उसने अभिषेक के मर्डर का प्लान बनाया। इस प्लान में उसने अपने चाचा और दोस्त को भी शामिल किया। पुलिस ने इंजीनियर पति, टीचर पत्नी और चाचा को गिरफ्तार कर लिया है।
   
ब्लैकमेलिंग बना हत्या का कारण
पुलिस ने मंगलवार देर रात भिलाई के सेक्टर-10 में निवासी कारोबारी विकास जैन, उसके दोस्त विजय कुमार और चाचा को शक के आधार पर हिरासत में लिया। पूछताछ में विकास ने खुलासा किया कि उसी ने अभिषेक की हत्या की थी। उसने बताया कि अभिषेक और उसकी पत्नी के बीच अवैध संबंध थे, उसके पास उसकी पत्नी का विडियो क्लिप भी था। क्लिप के आधार पर वह लगातार उसे ब्लैकमेल कर रहा था जिससे परेशान होकर उसने उसकी हत्या कर दी।

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