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गुरुवार, 8 अक्तूबर 2015

छत्तीसगढ़ - सीएम का फ़ेसबुक प्रेम केन्द्र की नजर में बेकार, कौशल विकास के आंकड़ों ने किया बंटाधार

छत्तीसगढ़ 08 अक्‍टूबर 2015 (जावेद अख्तर). छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह अपने राज्‍य को सूचना तकनीक से लैस बताते हुये फेसबुक और सोशल मीडिया का प्रयोग कर आम जनता से सम्‍पर्क साध रहे हैं मगर केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट ने राज्य सरकार के कौशल विकास के दावों की पूरी पोल खोल कर रख दी है। जिसके अनुसार, सीएम डॉ रमन सिंह का यह कीर्तिमान केन्द्र की नजर में किसी भी काम का नहीं है।
प्राप्‍त जानकारी के अनुसार केन्‍द्र की नजर में यह कार्यक्रम पूरी तरह बेकार है क्योंकि जमीनी स्तर पर अधिक कार्य करने की जरूरत है और राज्य सरकार फेसबुक और सोशल मीडिया द्वारा खुद की ब्रांडिंग करने में व्यस्त है। जो कि राज्‍य की हालत को देखते हुये उचित प्रतीत नहीं होता है। केन्द्र द्वारा हाल ही में जारी जनगणना आयुक्त की रिपोर्ट में यह सच सबके सामने आया है कि प्रदेश के 0.97 फीसद से भी कम विद्यार्थी व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे हैं। जो कि प्रशिक्षण संस्थानों की बदहाल स्थिति को दर्शा रहे हैं। इनमें महिलाओं की संख्या मात्र 22 हजार 586 है मतलब कि महिलाओं के लिए विकास नगण्य है। यह प्रतिशत विभिन्न संस्थानों और साक्षरता केंद्रों में अध्ययनरत 5 से 60 वर्ष आयु तक के लोगों की कुल संख्या 67 लाख 10 हजार 712 के आधार पर निकाला गया है। जो कि स्पष्ट दर्शा रहा है कि जमीनी स्तर पर कोई कार्य किया ही नहीं गया है।

अगर सिर्फ युवाओं की बात करें तो आबादी के अनुपात में व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में उनकी मौजूदगी नगण्य है। बावजूद इसके राज्य सरकार अपनी ब्रांडिंग करने में व्यस्त हैं जबकि होना यह चाहिए था कि वास्तविक स्थिति का सामना करते हुए जो भी कमी है उसमें सुधार किया जाए, प्रशिक्षण संस्थानों में बराबर मानिटरिंग की जाए, सर्वेक्षण द्वारा पता लगाने का प्रयास किया जाए कि आखिरकार राज्य के युवाओं को ऐसी क्या दिक्कत व परेशानी है जिसके कारण युवा प्रशिक्षण संस्थानों में जाना नहीं चाहते हैं या अभी तक क्यों नहीं गए हैं? उन कारणों का निराकरण किया जाना चाहिए ताकि वास्तविकता में राज्य के युवाओं के लिए कुछ अच्छा किया जा सके और उन्हें इस योजना का भरपूर लाभ मिल सके। गौरतलब रहे कि राज्य सरकार के अधीन विभिन्न तकनीकी शिक्षा संस्थानों में हर साल 20 हजार 342 विद्यार्थियों को प्रवेश दे सकने की क्षमता है। ऐसा तब है जबकि उद्योगों के लिए बड़ी संख्या में कुशल जनशक्ति की सबसे अधिक दरकार है। ऐसे कुशल जनशक्ति की खासकर राज्य में स्थापित उघोगों के लिए तो सबसे ज्यादा जरूरत होती है और होती जा रही है। इन योजनाओं की विफलता आउटसोर्सिंग को बढ़ावा देती है।
 
93 लाख लोगों ने नहीं देखा स्कूल
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के लिए यह बेहद शरम वाली बात ही कही जा सकती है क्योंकि एक ओर राज्य सरकार ऐसा माहौल बना रही है मानो प्रदेश में 90 फीसदी युवा वर्ग, कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षित हो चुका है। केंद्र की रिपोर्ट द्वारा जो आंकड़ों निकल कर सामने आए हैं वह काफी बुरी स्थिति का अनुभव कराते हैं। छग प्रदेश की आबादी में एक बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जिन्होंने किसी भी औपचारिक-अनौपचारिक शिक्षण संस्थान का मुंह तक नहीं देखा है। केंद्र द्वारा जनगणना आयुक्त की आबादी की शैक्षणिक स्थिति वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे लोगों की संख्या 92 लाख 89 हजार 475 है। इनमें से 57 लाख 9 हजार 800 केवल महिलाएं हैं। इनके अलावा करीब 95 लाख 45 हजार 11 लोग पहले किसी न किसी संस्थान से औपचारिक पढ़ाई कर चुके हैं। इनमें से सर्वाधिक संख्या पुरुषों की है। महिलाओं व आदिवासियों का विकास करने में राज्य की सरकार विफल साबित हो रही है क्योंकि इनकी प्रशिक्षित करने का आंकड़ा न के बराबर है।
   
प्रशिक्षण से बदलेगी तस्वीर
सीएसएसडीए की सीईओ प्रियंका जी ने कहा है कि किन्हीं कारणों से संस्थागत पढ़ाई नहीं कर पाए आम लोगों की तस्वीर प्रशिक्षण से ही बदलेगी। प्रदेश में एक सर्वेक्षण कराया जा रहा है जिसमें 14 से 47 वर्ष तक के लोगों से उनकी शैक्षणिक योग्यता, रुचि, आय और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए तीन क्षेत्रों की प्राथमिकताएं पूछी जा रही है। आने वाले 30 अक्टूबर तक हमारे पास पूरा डाटा होगा। उसके बाद ऐसे युवाओं को विभिन्न व्यावसायिक ट्रेड में प्रशिक्षण दिया जाएगा। नियोक्ताओं के साथ मिलकर उनकी प्लेसमेंट सुनिश्चित की जाएगी। उम्मीद है कि अगली जनगणना के आंकड़ों में तस्वीर बिल्कुल बदली नजर आए।

हालांकि यह बातें इससे पहले भी कही जा चुकी है और फिर से साल बदल गया मगर आंकड़ों में कोई खास सुधार नहीं हुआ है बीते 3 वर्षों में। प्रशिक्षण के अलावा भी कई योजनाओं को लागू किया गया था मगर राज्य में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि इन योजनाओं में आम आदमी, गरीब जनता, किसान व आदिवासियों की गिनती बहुत ही कम है जो कि विफलता को उजागर करती है, ऐसी जाने कितनी ही योजनाओं को लागू कर दिया गया हो मगर प्रदेश में वास्तविकता तो यही है कि कोई भी योजना आती है तो आज भी 70-75 फीसदी सीधे सीधे भ्रष्टाचार की ही भेंट चढ़ जाता है। केंद्र की रिपोर्ट व कैग की रिपोर्टों द्वारा असलियत को स्पष्ट भी किया जा चुका है। केंद्र ने राज्य सरकार को दो टूक कहा है कि राज्य में सरकार को आम जनता, गरीब किसानों व आदिवासियों के लिए जितनी योजनाओं को लागू किया गया है उस पर जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है। काम में पारदर्शिता लाने की जरूरत है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। बेलगाम उच्चाधिकारियों पर नकेल कसने की जरूरत है। मंत्री व नेताओं पर लगाम लगाने की जरूरत है। राज्य सरकार को अभी तक इन जरूरी कामों को कर लेना चाहिए था मगर आज भी स्थिति पहले के ही जैसी बनी हुई है जो कि चिंता का विषय भी है क्योंकि छत्तीसगढ़ में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का गौरव प्राप्त किया है। केंद्र को काफी उम्मीदें थीं जो कि धीरे धीरे अब धूमिल होती जा रही है विशेषकर सूबे के मुखिया डॉ रमन सिंह से।

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