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सोमवार, 28 सितंबर 2015

भारत ने रचा इतिहास, 'एस्ट्रोसैट' का सफल प्रक्षेपण

श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 28 सितंबर 2015 (IMNB). 'एस्ट्रोसैट' और छह विदेशी उपग्रहों को लेकर जाने वाले रॉकेट का सोमवार को सफल प्रक्षेपण किया गया। रॉकेट का प्रक्षेपण सुबह ठीक 10 बजे किया गया। 44.4 मीटर लंबा और 320 टन वजनी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान एक्सएल (पीएसएलवी-एक्सएल) रॉकेट पोर्ट पर लांच पैड से अलग हुआ। 'एस्ट्रोसैट' देश का पहला बहु-तरंगदैर्ध्य वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह है, जो ब्रहांड के बारे में अहम जानकारियां प्रदान करेगा।

एस्ट्रोसैट की विशेषताएं आकाशीय वस्तुओं के अध्ययन के लिए बनाया गया एस्ट्रोसैट उपग्रह 1515 किलोग्राम वजनी है। इसको बनाने में 10 वर्ष लगे हैं और इसके निर्माण पर 178 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस उपग्रह को बेंगलुरु में इसरो सेटेलाइट सेंटर में असेम्बल किया गया है। इस उपग्रह को पृथ्वी से लगभग 650 किलोमीटर की दूरी पर अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। यह उपग्रह पांच वर्षों तक अपनी सेवाएं देगा। इसकी मदद से ब्रह्मांड को समझने में मदद मिलेगी। इससे ब्लैक होल्स और तारों तथा आकाशगंगाओं के बनने और नष्ट होने के बारे में अध्ययन किया जाएगा। भारत के लिए एस्ट्रोसैट के मायने एस्ट्रोसैट के सफल प्रक्षेपण के साथ ही भारत ऐसा पहला विकाशील देश बन गया है, जिसका अंतरिक्ष में अपना टेलीस्कोप है। इस सफलता के साथ ही भारत अमेरिका, यूरोपिय संघ और जापान के उस समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास ये काबिलियत है। चीन फिलहाल अपने पहले स्पेस टेलीस्कोप हार्ड एक्सरे माड्युलेशन टेलीस्कोप पर काम कर रहा है। एस्ट्रोसैट के सफल प्रक्षेपण के बाद इसरों ने दावा कि भारत ऐसा पहला राष्ट्र है जिसके पास बहु तरंगदैर्ध्य वाला अंतरिक्ष निगरानी उपग्रह है, जो बृहद अंतरिक्षीय स्रोतों में तीव्र गति से होने वाले परिर्वतनों पर नजर रखने में सक्ष्म है।

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