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शनिवार, 12 सितंबर 2015

NIA ने किया खबरदार, छत्तीसगढ़ में फैल रहा नकली नोटों का कारोबार

छत्तीसगढ़ 12 सितम्‍बर 2015 (जावेद अख्तर). छत्तीसगढ़ पुलिस व खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य में नकली नोटों का कारोबार बीते 3 वर्षों में काफी तेज़ी से फलफूल रहा है। दिल्ली की खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, सबसे अधिक गुजरात में नकली नोट खपाए जाते हैं और गुजरात के बाद देश में सबसे अधिक नकली नोट छत्तीसगढ़ में खपाए जा रहे हैं।
प्राप्‍त जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ के चारों ओर ऐसे प्रदेश हैं जिसकी सीमाओं पर चौकसी चाक चौबंद नहीं है, इसी का लाभ लेते हुए नकली नोटों के कारोबारी अन्य प्रदेशों से सीमाओं के रास्ते नकली नोट बड़ी संख्या में लाना ले जाना कर रहे हैं इसीलिए नकली नोटों की खेप गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा पकड़ी गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में तकरीबन 30,354,604 (तीन करोड़ तीन लाख चौव्वन हजार छः सौ चार) नकली नोट बरामद किए गए हैं। इसमें गुजरात से सबसे ज्यादा 8,747,820 (सत्तासी लाख सैंतालीस हजार आठ सौ बीस) और छत्तीसगढ़ से 7,586,910 (पचहत्तर लाख छियासी हजार नौ सौ दस) नकली नोट पकड़े गए। यह आंकड़े चौंकाने वाले हैं, क्योंकि गुजरात अंतरराष्ट्रीय बार्डर से लगा हुआ है, जबकि छत्तीसगढ़ देश का मध्य राज्य कहलाता है। गृह मंत्रालय को छत्तीसगढ़ पुलिस की ओर से भेजी गई रिपोर्ट की मानें तो नक्सल इलाकों के जरिए यहां सबसे ज्यादा नकली नोटों की तस्करी हो रही है। 
एनआईए की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश और नेपाल के बाद अब मलेशिया, थाईलैंड और सऊदी अरब के ओमान में भारतीय मुद्रा के नकली नोटों का स्टॉक रखा जा रहा है। ये विदेशों के ऐसे शहर हैं, जहां भारतीयों का सबसे ज्यादा आना-जाना है। इन देशों से हवाई और समुद्री रास्तों के जरिए सबसे ज्यादा नकली नोटों की तस्करी होती है। छत्तीसगढ़ से हर महीने ढाई हजार से ज्यादा लोग बैंकॉक, थाईलैंड और सऊदी अरब के शहर की यात्रा करते हैं। नकली नोटों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर एनआईए और छत्तीसगढ़ स्तर पर रायपुर के सिविल लाइंस थाने में इसकी जांच होती है। रायपुर में ही सभी बैंकों के मुख्य ब्रांच भी हैं। रायपुर में नकली नोटों की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य भी मिले, लेकिन मामले की कड़ी बांगलादेश और नेपाल के रास्ते जुड़ती थी। वहां के बॉर्डर इलाकों से ही आते-जाते ऐसे नकली नोटों को खपाए जाते थे। हैरानी की बात यह है कि इन तमाम बिंदुओं को लेकर कई तरह के सवाल भी खड़े हो चुके हैं। बैंकों में नकली नोट मिलने के बाद वो रुपए ग्राहकों की जेब से काटा जाता है। बदले में केवल बैंक वाले इसकी थाने में सीधे रिपोर्ट नहीं करते। इसकी केवल थाने को जानकारी दी जाती है। एसआईबी के आईजी ने बताया कि जांजगीर-चांपा, राजनांदगांव और कुछ ग्रामीण इलाकों से भारी संख्या में नकली नोट बरामद किए गए थे। इसे प्रिंटर के माध्यम से छापकर गांव वालों को मजदूरी के एवज में बांटा जाता था। कई मामलों की जांच तो अब भी चल रही है। इसके नेटवर्क की भी तलाश की जा रही है, ताकि बाहर से सप्लाई होने वाले नकली नोटों के स्रोत को पकड़ा जा सके।
राजनांदगांव में नकली नोट छापने वाली मिली थी मशीन
राजनांदगांव के एएसपी ने बताया कि राजनांदगांव में मार्च माह में एक ऐसी फैक्ट्री में पुलिस ने छापा मारकर नकली नोट छापने वाली मशीन बरामद की थी। वहां के नोट फैक्ट्री और आसपास मजदूरी करने वालों को बांटा जाता था। इस नोट की एक बड़ी खेप नक्सल इलाकों के गांवों में भी भेजी जाती थी। इस मामले की जानकारी गृह विभाग को भी भेजी गई थी। पुलिस मुख्यालय के एक अफसर ने बताया कि इसी तरह के मामले बस्तर और ओडिशा बॉर्डर के आसपास भी अभी हाल फिलहाल में पकड़े जा चुके हैं, वहां के जरिए नकली नोटों की खेप कई जिलों में खपाई जा चुकी है। रायपुर समेत कुछ जिलों के बैंकों में तो हर रोज दर्जनों की संख्या में नकली नोट गड्डियों के साथ पकड़े जाते थे।

नकली नोट चेक करने के लिए सात नई तकनीक व नया नंबरिंग सिस्टम
बैंकों में नकली नोटों की पड़ताल के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने सात नए सुरक्षा की तकनीक को अपनाया है। इसमें एक ऐसा नंबरिंग सिस्टम भी है, जिससे नकली नोटों का पता लगाना आसान हो जाएगा। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सबसिडी से संचालित भारतीय मुद्रान प्राइवेट लिमिटेड और सिक्योरिटी प्रिटिंग एंड मिंटिंग कॉपोर्रेशन की मदद से यह नया सिस्टम तैयार किया गया है। इस सिस्टम को जल्द ही छत्तीसगढ़ समेत देश के सभी बैंकों में लागू कर लिया जाएगा। रायपुर आरबीआई के एक अफसर ने बताया कि इस सिक्योरिटी सिस्टम का अभी खुलासा नहीं किया गया है। उनके पास अगले कुछ दिनों में इससे संबंधित गाइडलाइंस आएंगी। नए फीचर्स के तहत नए नोट छापे जाएंगे, जिनकी कॉपी करना आसान नहीं होगा। अगले साल 2016 तक ऐसे नोट बैंकों तक पहुंच जाएंगे।

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