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मंगलवार, 4 अगस्त 2015

रायपुर - धान घोटाले का खुलासा करने वाले की मौत, पुलिस ने प्राथमिक जांच में बताया आत्महत्या

 
छत्तीसगढ़ 4 अगस्‍त 2015 (जावेद अख्तर). छत्तीसगढ़ के नागरिक आपूर्ति निगम में करोड़ों के घोटाले का खुलासा करने वाले व्हिसिल ब्लोअर सुरेन्द्र शाक्या जबलपुर स्थित अपने घर पर संदिग्‍ध रूप से मृत हालत में मिले, सुरेन्द्र की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं? मगर पुलिस ने प्राथमिक जांच में इसे आत्महत्या करार दे दिया। क्या छत्तीसगढ़ प्रदेश में भी व्यापम घोटाले की तरह ही मौतों का सिलसिला तो नहीं शुरू होने जा रहा है?
लगता है छत्तीसगढ़ का चर्चित पैडी घोटाला मध्यप्रदेश के जान लेवा व्यापम घोटाले की तर्ज पर चल पड़ा है। बताते चलें कि सुरेंद्र के परिजनों ने आत्महत्या की बात को नकारते हुए पुलिस पर सही से छानबीन नहीं करने का आरोप लगाया है। सुरेन्द्र के बड़े बेटे ने कहा कि मेरे पिता सिद्धांतों पर दृढ़ता से जीने वाले व्यक्ति थे वो हरेक परेशानी व दिक्कतों का सदैव सामना करते हुए खड़े रहे इसलिए उनके आत्महत्या करने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता है। हम सभी घोटालेबाजों से उनकी जान बचाने में असफल रहे जिनका हमें सदैव अफसोस रहेगा। उसने यह भी कहा कि मैं अपने पिता की आत्मा को शांति दिलाने के लिए अंत तक न्याय के लिए लडूंगा। बाकी परिजनों ने भी पुलिस की आत्महत्या की बात को पूरी तरह नकारते हुए कहा कि सुरेंद्र साइकिल से ग्वालियर से कश्मीर तक की दुर्लभ यात्रा अकेले कर चुके थे, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितने हिम्मत वाले व्यक्ति थे, ऐसे में एक ऐसे विशिष्ट हिम्मत वाले व्यक्ति से आत्‍महत्या की उम्मीद करना, एक बेहद भद्दा मजाक जैसा ही है। सुरेन्द्र शाक्या के बेटे नितिन शाक्य ने कहा कि जो लोग इस घोटाले में संलिप्त हैं वे काफी बड़ी पहुंच वाले व बेहद खतरनाक हैं इसलिए घोटाले में संलिप्त सभी सदस्य इस मामले को दफनाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। चूंकि इस घोटाले में कई सफेदपोश व उच्च अधिकारियों के नाम भी शामिल है इसलिए यह मामला संवेदनशील भी है। वहीं पुलिस शाक्या की मौत को एक साधारण आत्महत्या का केस बताने में जुटी है। 

पुलिस का दावा है कि जहां शाक्या की मौत हुई उन्हें वहां से दो पेज का सुसाइड नोट भी मिला है। वहीं एक अन्य आश्चर्यजनक घटनाक्रम में शाक्या के अंतिम संस्कार में भाग लेने वाले उनके एक साथी की वहां से लौटते समय रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी। यह वाक्या शनिवार को ललित सागर नेशनल हाइवे पर हुआ। मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ दुर्घटना कर भागने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। बता दें कि छत्तीसगढ़ के पैडी स्कैम के छींटे मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और उनके परिवार तक भी पहुंच रहे हैं। इसको लेकर कांग्रेस ने उनके खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है तो वहीं पूरे देश में इस घोटाले से राज्य की भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री समेत भाजपा के नेताओं की जमकर किरकिरी हुई है। छत्तीसगढ़ के सबसे तेजी से विकास की बातों पर भी सवालिया निशान लगा है। इस घोटाले के खुलासे के बाद साफ़ सुथरी छवि वाले मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की छवि भी काफी खराब हो गई है और उन पर जो राज्य को नाज था वह भी समाप्त हो गया है। पीडीएस घोटाले के बाद अमृत नमक घोटाले ने तो राज्य की भाजपा सरकार को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है क्योंकि नमक राज्य के गरीब व आदिवासियों को वितरण किया जाना था जिसमें जम कर घोटाला किया गया। मगर राज्य सरकार के मंत्री की ढुलमुल और सुस्त कार्यप्रणाली से अधिकारियों ने दिल खोल कर केन्द्र व राज्य शासन की हरेक योजनाओं में भ्रष्टाचार किया है। जिसका खुलासा एक के बाद एक हो रहा है। इस से राज्य सरकार की छवि धूमिल हुई है।

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