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शनिवार, 8 अगस्त 2015

रांची - 5 महिलाओं की डायन बताकर हत्या, माहौल तनावपूर्ण

रांची 8 अगस्‍त 2015 (स्‍पेशल कवरेज). झारखंड की राजधानी रांची से 45 किलोमीटर दूर एक गांव मांडर में शुक्रवार रात 5 महिलाओं की कथित तौर पर डायन बताकर हत्या कर दी गई। उक्त गांव रांची के मंडार ब्लॉक के अंतर्गत आता है। आरोप है कि महिलाएं मदद की गुहार लगाती रहीं लेकिन, गांव वालों ने रहम नहीं किया और पांचों महिलाओं को भालों से गोदकर और पत्थरों से कुचलकर उनकी हत्या कर दी।

पुलिस को घटना की जानकारी आज मिली और पुलिस मौके पर पहुंची। इस समय मांडर गांव में हालात तनाव पूर्ण बने हुए हैं और लोग दहशत में हैं। डीआईजी समेत करीब 300 पुलिसवाले हालात से निपटने के लिए मौके पर मौजूद हैं। पुलिस ने इस मामले में 50 गांववालों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनसे पूछताछ जारी है। पूछताछ में गिरफ्तार गांववालों ने हत्या की बात कबूल कर ली है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने प्रथम दृष्टया सबूतों के आधार पर बताया कि ऐसा लगता है कि उक्त मामले में ग्रामीण ही शामिल थे। बाहर के किसी तत्व के दखल देने या प्रभाव स्थापित करवाने की संभावना नहीं दिख रही है।

बताते चलें कि गांव में कुछ महीने पहले चार बच्चों की मौत हुई थी। इसके बाद से ही गांववाले इन महिलाओं पर डायन होने का आरोप लगा रहे थे। उनका मानना है कि इन्हीं की वजह से उन बच्चों की मौत हुई। पुलिस ने बताया कि शुक्रवार देर रात गांव में पंचायत बुलाई गई। यहां गांव की ही पांच महिलाओं पर डायन होने का आरोप लगाया गया। गांव वाले महिलाओं को घर से कुछ दूर ले जाकर पीटने लगे। इसके बाद उन्हें भालों से गोदा और फिर पत्थर से कुचलकर उनकी हत्या कर दी। डायन बताकर मार डालने की घटना झारखंड के लिए नई नहीं है। ऐसी घटनाएं यहां आम हैं। पहले भी, राज्य से इस तरह की घटनाएं सामने आती रही हैं।

 नेशनल क्राइम ब्यूरो रिकॉर्ड्स के अनुसार साल 2000 से 2012 के बीच देशभर में डायन बताकर की गई हत्याओं की ज्ञात संख्या 2097 हैं। इनमें से सिर्फ झारखंड में हुए मामले 363 हैं। हालांकि झारखंड सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2011 से 2013 के बीच 400 से भी ज्यादा की डायन होने का आरोप लगाकर हत्या की गई है। इसके अलावा, 2854 मामले पुलिस में दर्ज हैं। झारखंड में डायन प्रथा विरोधी कानून साल 2001 से ही लागू है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून बनने के बाद भी ना तो उसे प्रभावी तरीके से लागू करने की कोशिश की गई है और ना ही समाज में कोई खास बदलाव आया है।

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