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शनिवार, 8 अगस्त 2015

याकूब की फांसी के बाद खतरे में है नागपुर !

मुंबई 08 अगस्त 2015 (IMNB). 30 जुलाई को याकूब मेमन को दी गई फांसी के बाद हालांकि पूरे महाराष्ट्र में हाई अलर्ट है, पर आईबी से जो इनपुट्स आए हैं, उसमें नागपुर पर सबसे ज्यादा खतरा बताया गया है। मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। नागपुर आतंकवादियों का पहला क्यों टारगेट हो सकता है, इसके पीछे आईबी व अन्य खुफिया एजेंसियों के अपने-अपने तर्क हैं।

कुछ साल पहले जब इंडियन मुजाहिदीन से जुड़े कतिल सिद्दीकी का पुणे की जेल में मर्डर कर दिया गया था, तो उसके कुछ महीने बाद ही इंडियन मुजाहिदीन ने पुणे में बम ब्लास्ट कराए थे। चूंकि याकूब को फांसी नागपुर की जेल में दी गई, इसलिए आईबी व अन्य खुफिया एजेंसियों को नागपुर पर ज्यादा खतरा दिख रहा है। नागुपर में बम ब्लास्ट व आतंकवादी हमले की आशंका इसलिए भी ज्यादा बताई जा रही है, क्योंकि नागपुर में आरएसएस का मुख्यालय है। यही नहीं, नागपुर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का घरेलू शहर भी है। 

याकूब मुंबई का मूल निवासी था और माहिम की अल हुसैनी बिल्डिंग में रहता था। इसलिए मुंबई को उसी दिन से हाई अलर्ट पर कर दिया गया था, जिस दिन से मुख्यमंत्री ने याकूब की फांसी की तारीख 30 जुलाई सार्वजनिक कर दी थी। मुंबई में हाई अलर्ट के साथ ही कई बड़े राजनेताओं व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया की भी सुरक्षा तगड़ी कर दी गई है। मारिया ने ही 1993 के बम ब्लास्ट की गुत्थी सुलझाई थी। मारिया जब एटीएस चीफ थे, उस वक्त आतंकवादी कम से कम तीन बार उनकी गाड़ी तक पहुंच गए थे, पर ऐन वक्त पर वह साजिश को अंजाम पर नहीं पहुंचा पाए। खुफिया एजेंसियों को इस बात के भी इनपुट्स मिले हैं कि आतंकवादी महाराष्ट्र में पुलिस या आर्मी के किसी ट्रेनिंग सेंटर पर हमला कर सकते हैं। इसलिए जो इस साजिश को अंजाम दे सकते हैं, उनकी खोजबीन तेज कर दी गई है। इनमें दो साल पहले खंडवा की जेल से भागे 2 लोगों के नाम सबसे ऊपर हैं। खंडवा की जेल से वैसे तो कुल 6 लोग भागे थे, लेकिन पिछले साल इनमें से 4 को एनकाउंटर में मार दिया गया था। इन सभी छह लोगों ने जेल से फरारी के बाद देश भर में अलग-अलग जगहों पर ब्लास्ट करवाए थे।

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