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मंगलवार, 18 अगस्त 2015

लखनऊ - पिछडों व दलितों के हक के लिये संघर्ष करेगा प्रबुद्ध अम्बेडकर क्लब

लखनऊ 18 अगस्‍त 2015 (शाहरुख़ खान). हमारे देश को आजादी मिले हुए 69 वर्ष हो गये पर हमारे देश में एक समाज है जिसके कुछ लोगों को उनकी आजादी अभी भी नहीं मिली है । वो पिछड़ा वर्ग और अनसूचित जाति के लोग। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश में अन्य प्रदेशों की तुलना में पिछड़े वर्गो व अनुसूचित जातियों का सरकारी नौकरियोँ में प्रतिनिधित्व धीरे-धीरे कम होता जा रहा है । यह कहना है प्रबुद्ध अम्बेडकर क्लब की कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य गुलाब यादव का।

प्रबुद्ध अम्बेडकर क्लब कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य गुलाब यादव ने बताया कि उन्‍होंने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग लखनऊ के समक्ष आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा-3(5) के अंतर्गत दिनांक 29.03.1994 को निर्गत रोस्टर प्रणाली के अनुसार ज्येष्ठता सूची प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सम्बन्धित व्यवस्था को लागू किये जाने का मुददा उठाया है। माननीय आयोग ने प्रकरण का संज्ञान लेकर दिनांक 18.08.2015 को प्रमुख सचिव कार्मिक को संगत अभिलेखों के साथ सुनवाई हेतु उपस्थिति आदेश जारी किया है । 

श्री यादव  ने पत्रकारों से कहा कि संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्‍येक वर्ग विशेषकर पिछड़े व अनुसूचित जाति / जनजाति संवर्ग के अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने के लिए संघर्ष करना ही हमारा उद्देश्य है । सिंचाई विभाग में कार्यरत अभियंता अनुसूचित जाति होने के कारण अपने पद से डिमोट किये जा रहे है । वहीँ आबकारी विभाग में दिनांक 13.12.2014 को उप आबकारी आयुक्त के पद पर हुए 22 प्रोन्नतियोँ में 85% पिछड़ा अल्पसंख्यक व अनुसूचित जाति/जनजाति का प्रतिनिधित्व शून्य है । प्रदेश सरकार की डिमोशन निति को भी माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने याचिका संख्या 426881/2015 के अंतर्गत दिनांक 31.07.2015 को स्थगित कर दिया है, इसके बावजूद मीडिया में पिछड़े व अनुसूचित जाति संवर्ग के भागीदारी का विरोध किया जाता है । 

उन्‍होंने बताया कि ऐसी स्थिति न केवल असंवैधानिक, बन्धुत्व व सामाजिक को कमजोर करेगी बल्कि 85% पिछड़े अल्पसंख्यक व अनुसूचित जाति/जनजाति समुदाय का देश में असुक्षित होने की भावना से सामजिक संतुलन बिगड़ेगा । देश के सर्वोगीण विकास के लिए सभी वर्गो का प्रतिनिधित्व प्रत्येक क्षेत्र में समान होना चाहिये तथा कमजोर वर्गो के प्रति भाई चारे की नीति अपनाई जानी चाहिये । अगर परिवार के बीमार सदस्य के लिये कुछ अतिरिक्त व्यवस्था की जाती है तो परिवार के अन्य सदस्यों को इसका सहर्ष स्वागत करना चाहिये ।

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