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शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

छत्तीसगढ़ - विकास यात्राओं के नाम पर मुख्यमंत्री ने फूंके साढ़े नौ करोड़

छत्तीसगढ़ 7 अगस्‍त 2015 (जावेद अख्तर). भाजपा राज्य सरकारों और उनके मुख्यमंत्रियों पर बुरी बलाएं टलने का नाम ही नहीं ले रही है। राजस्थान की वसुंधरा राजे, मध्यप्रदेश के शिवराज सिंह के बाद भाजपा के सबसे 'नेक' मुख्यमंत्री माने जाने वाले छत्तीसगढ़ के रमन सिंह पर भी एक के बाद एक दाग लग रहे हैं। ताजा मामला विधानसभा चुनावों से पहले निकाली गयी विकास यात्राओं से जुडा है। इस मामले में रमन सरकार पर 9.58 करोड़ रुपए की अनियमितता के आरोप लग रहे हैं।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, रमन सिंह ने विकास मद की रकम को अपनी राजनीतिक विकास यात्राओं में खर्च कर डाला। सूत्रों के अनुसार कैग द्वारा लोक निर्माण विभाग के (2013-14) के अभिलेखों की जांच के दौरान 2.33 करोड़ की अनियमितता सामने आई है। इस पैसे का उपयोग विकास यात्रा के दौरान तंबू लगाने पर एवं अन्य कार्यों में किया गया। जिसे बाद में सड़कों के निर्माण और सालाना मरम्मत और रखरखाव के खर्चे में दिखा दिया गया। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के जनसंपर्क विभाग ने 7.25 करोड़ रुपये आदिवासी क्षेत्रों में प्रचार प्रसार में खर्च कर दिए। विकास यात्रा के लिए अलग से कोई बजट नहीं रखा गया था इसलिए नियमित बजट से ही प्राप्त धन से विकास यात्रा में अवैधानिक तरीकों से खर्च कर दिया गया। पता चला है कि लोक निर्माण विभाग ने स्वीकार किया कि वहां जो भी खर्चे हुए थे उन्हें जनसंपर्क विभाग द्वारा भुगतान करने पर सही कर दिया जाएगा। जनसंपर्क विभाग ने बताया कि विकास यात्रा कोई स्‍थायी कार्यक्रम नहीं था जिसके लिए अलग से बजट रखा जाए या अलग से प्रस्ताव बनाया जाए।

राज्य सरकार और उनके बेलगाम अधिकारियों ने अपनी मनमर्जी के मुताबिक शासन के मद का दुरूपयोग पर दुरूपयोग किया और फिर अब दस्तावेजों में लीपापोती करके हिसाब किताब बराबर किया जा रहा है। भ्रष्टाचार करने और गलती पकड़ जाने के बावजूद भी अधिकारियों को सजा के नाम पर बस एक विभाग से हटाकर दूसरे विभाग में भेज दिया जा रहा है। लगभग 32 ऐसे अधिकारियों के नाम सामने आए हैं जिन पर राज्य सरकार की मेहरबानियां बरसी हैं। बड़े बड़े घोटाले करने के बाद भी उनका प्रमोशन किया गया है। फाइलों को इधर उधर कर दिया गया और कुछ फाइलों से महत्वपूर्ण दस्तावेज़ गायब मिले हैं। राज्य में सबसे अधिक संदिग्ध जल संसाधन विभाग, रायपुर है। जल संसाधन विभाग में 1475 करोड़ रुपये की अनियमितता के आरोप वाली योजनाओं की फाइलें आग लगने से स्वाहा हो गई है, परन्तु आग लगने के कारण का, जल संसाधन विभाग के मंत्री, सचिव और ईएनसी संतुष्टिजनक उत्तर नहीं दे पाए। कई माह बीत जाने के बावजूद भी विभागीय जांच टीम रिपोर्ट नहीं दे पाई है और न ही कारण को स्पष्ट कर पाई है। सिर्फ संदिग्ध योजनाओं की फाइलों में आग लगने के सवालों पर ईएनसी जवाब देने में विफल रहे। इस मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन होना चाहिए और तय समय सीमा के अंदर रिपोर्ट जमा करने की बाध्यता होनी चाहिए, तब ही आग लगने का कारण स्पष्ट हो सकेगा अन्यथा विभागीय जांच टीम के भरोसे सौ वर्षों में भी जांच रिपोर्ट नहीं जमा हो पाएगी। आग लगने और दस्तावेज जलने के लिए संदिग्ध को ही विभागीय जांच टीम की कमान दिया जाना स्पष्ट करता है कि आग लगने के कारण का खुलासा न होने पाए और इस मामले में अन्य कोई भी हस्तक्षेप न कर सके।

राज्य सरकार ने अनैतिक तरीकों से निजी कंपनियों को भी लाभ पहुंचाया है। कैग रिपोर्ट में इस बात का भी दावा किया गया है कि विकास यात्रा से जुड़ी विज्ञापन एजेंसी को भी उसके द्वारा पेशकश दर के अलावा अनैतिक लाभ दिया गया जोकि पूरी तरह नियमों का उल्लंघन करती है। इसमें बताया गया कि जनसंपर्क विभाग ने कांसोल इं‌डिया कम्यूनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा ‌बिना किसी निविदा प्रक्रिया के द्वारा दिया गया 40.53 लाख का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार एड एजेंसी को एसएमएस और वाइस एसएमएस के जरिए लोगों तक संपर्क बनाना था लेकिन यहां यह भी ध्यान नहीं रखा गया कि उक्‍त कंपनी ने वास्तव में एसएमएस किए भी हैं या नहीं और वाइस एसएमएस की प्रक्रिया तक दर्ज नहीं है। नियम कायदे और कानून को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी के मुताबिक कार्य किया गया है। जिस पर दिल आ गया उसे करोड़ों दे दिया गया भले चाहे वह ब्लैक लिस्टेड हो या अपराधी हो। प्रक्रिया के तहत भरे जाने वाले फार्म में संविधान के प्रावधानों के विपरीत बातों को दर्ज किया गया है। राज्य सरकार की सफाई को कैग ने नकार दिया है क्योंकि शासन व सचिव ने महज़ मौखिक रूप से सफाई पेश की, और हेराफेरी के आंकड़ों पर भी गैर जिम्मेदाराना रूप से स्पष्टीकरण दिया गया। 

कैग रिपोर्ट के अनुसार इसी के सापेक्ष एक अन्य पेशकश डिजिटल स्क्रीन प्राइवेट लिमिटेड मुंबई द्वारा अप्रैल 2013 में दी गई थी। जिसमें मुख्यमंत्री की विकास यात्राओं के दौरान होने वाली आम सभाओं में ट्रक पर लगाए गए एलईडी से सरकार की विभिन्न योजनाओं का प्रचार किया जाना था। रिपोर्ट में जनसंपर्क विभाग की इस बात के लिए खिंचाई की गई है कि उसने बिना किसी विधिवत निविदा प्रक्रिया के उक्‍त एजेंसी का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया। इसके अलावा कंपनी को भुगतान के लिए खास शर्त रख दी गई। जिसकी वजह से यह संदिग्‍ध और अनियमित सौदा बन गया। जबकि मॉनिटरिंग के पहले ही जनसम्पर्क ने भुगतान कर दिया। राज्य सरकार ने कम समय का हवाला दिया। कैग ने सरकार की इस प्रतिक्रिया को स्वीकार करने से इंकार कर दिया कि एलईडी स्क्रीन लगे ट्रक का उपयोग विकास यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले लिया गया इसलिए इसमें निविदा प्रक्रिया आमंत्रित करने का समय नहीं बचा था। जबकि मॉनिटरिंग से पहले भुगतान के प्रश्न पर अधिकारी जवाब देने की बजाय इधर उधर ताकते रहे। इस पर भी कैग ने खिंचाई की, दीवारों पर लेखाजोखा दर्ज है क्या? तो वहीं राज्य सरकार ने कहा कि कंपनी दागी थी इसकी जानकारी नहीं थी। जबकि कैग ने कहा कि जब निविदा प्रक्रिया नहीं निकाली गई तो इस कामनवेल्थ घोटाले की दागी कंपनी को सरकारी मेहमान के तौर पर निमंत्रण दे कर बुलाया गया है क्योंकि निविदा प्रक्रिया आमंत्रित ही नहीं हुई तो कंपनी का यहाँ होने का प्रश्न ही नहीं उठता है। राज्य सरकार इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं दे सकी। 

कैग द्वारा तंबू घोटाले की जांच रिपोर्ट की मांग की जाने पर राज्य सरकार ने बताया कि उस घोटाले की जांच के लिए टीम का गठन ही नहीं किया गया था। जिस पर कैग ने जमकर राज्य सरकार को लताड़ लगाई। कैग ने कहा कि राज्य सरकार संविधान, नियम, कानून और प्रावधानों के विपरीत कार्य कर रही है और भारत सरकार की बजाए अपनी स्वंय की मनमानी नीतियां बना कर लागू कर दी जा रही हैं और राज्य सरकार पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबी हुई है इसीलिए मंत्रियों, संत्रियों और शासकीय अधिकारियों ने तानाशाही वाला रूख अपना रखा है। क्‍या राज्य सरकार ने सभी नियम कानूनों को समाप्त कर दिया है और अपनी मनमर्जी से हुकूमत कर रही है।

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