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रविवार, 9 अगस्त 2015

कानपुर - 'एक नम्‍बर भरोसे का' फिर हुआ पूरे नम्‍बरों से पास

कानपुर 8 अगस्‍त 2015. एक बार फिर कानपुर आई.जी का 'एक नम्‍बर भरोसे का' पूरे नम्‍बरों से पास हुआ है। इस हेल्‍पलाइन की सहायता से रावतपुर गांव निवासी एक महिला को उसका महीनों से खोया बेटा वापस मिल गया। लापता बालक को रेलवे की लान्‍ड्री में जबरन बंधक बना कर काम कराया जा रहा था। कानपुर के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा संचालित यह भरोसे का नम्‍बर दिनों दिन भरोसेमन्‍द ओर लोकप्रीय होता जा रहा है।

केशव नगर रावतपुर गाँव निवासी आशा देवी पत्नी राजेंद्र सिंह ने बताया कि उसका घर गोरखपुर में है जहां उसके परिवार के सभी लोग रहते हैं। उसका छोटा बेटा विजय (उम्र 14 वर्ष) वहीं रहकर पढाई कर रहा था, छुट्टी के दौरान वो कानपूर आया था, छुट्टी समाप्त होने के बाद उसके बडे भाई ने उसे कानपुर सेंटल से गोरखपुर जाने वाली ट्रेन में बैठा दिया था किन्तु वो अपने घर नहीं पंहुचा। पीडित महिला द्वारा एक माह तक कानपुर सेंटल से गोरखपुर के बीच पड़ने वाले सभी जी0आर0पी0 के थानों पर सुचना दी गई परंतु किसी के द्वारा न तो मुकदमा लिखा गया और न ही कोई तलाश की गई। 30 जुलाई को जी0आर0पी0 कानपुर द्वारा गुमशुदगी दर्ज करने के बाद भी कोई कारवाही नहीं की गई, इसी बीच उसके एक पडोसी ने बताया की कानपुर पुलिस महानिरीक्षक के '' एक नंबर भरोसे का'' पर सुचना कर दो काम हो जायगा, तब उसने 5 अगस्‍त को इस नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। उपरोक्त प्रकरण में सर्विलान्स द्वारा ट्रैक करने पर प्रदीप पाण्डेय पुत्र चंद्र प्रकाश पाण्डेय निवासी पचेदवा थाना अहरवाली जिला अम्बेडकर नगर को पकड़ा गया तो उसने बताया कि उक्त बच्चे को नशीला पदार्थ खिलाकर मैंने रेलवे के एसी कार में उपयोग होने वाले कपडे धुलने के लिए गोरखपुर में लाइन केअर सेंटर लांड्री में कपडा धुलाई के लिए लगा रखा है। उक्त लॉन्ड्री का मालिक अरविंद अग्रहरि , निवासी असरफ गंज गुड्डू मंडी, राज घाट गोरखपुर है। कानपुर पुलिस के अथक प्रयासों से विजय की दिनांक 7 अगस्‍त को बरामदगी हुयी। विजय ने बताया कि वह गोरखपुर स्टेशन पर रात 2.30 पर पंहुचा था। रात अधिक होने के कारण स्टेशन पर ही रुक गया तभी उसे एक आदमी (प्रदीप पांडेय) ने नशीला पदार्थ खिलाकर स्टेशन की कपडा धुलाई की कंपनी में जबरन लगा रखा था, वहां उसको एक बार खाना दिया जाता था तथा नशीला पदार्थ खिलाया जाता था एवं सभी लड़कों को लांड्री के अंदर बंद करके रखा जाता था। वहां पर मेरे जैसे कई लड़के काम कर रहे हैं। विजय के पिता राजेंद्र सिंह द्वारा इस सम्बन्ध में थाना जी0आर0पी0 गोरखपुर में अभियोग पंजीकृत कराने का प्रयास किया गया किन्तु वहां पर कोई अभियोग पंजीकृत नहीं किया गया। अतः उपरोक्त प्रकरण में अभियोग पंजीकृत करने हेतु थाना प्रभारी जी0आर0पी0 कानपुर सेन्ट्रल को आदेशित किया गया कि नियमानुसार अभियोग दर्ज कर विवेचना करें |

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