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सोमवार, 27 जुलाई 2015

छत्तीसगढ़ - शासकीय निर्माण कार्यों में बाल मजदूरी, पीडब्ल्यूडी की न देखने की मजबूरी

धमतरी/छत्तीसगढ़ 27 जुलाई 2015(जावेद अख्तर). लोक निर्माण विभाग संभाग धमतरी के ग्राम नारी, विकासखंड कुरूद में आईटीआई के छात्रों के लिए छात्रावास का नव निर्माण किया जा रहा है। छात्रावास निर्माण में नियमों की खुली अनदेखी करते हुये बाल मजदूरों से काम लिया जा रहा है। पर श्रम विभाग को कुछ दिखायी नहीं पड रहा और प्रशासनिक अमला आंखों पर पट्टी बांधकर बैठा हुआ है।
 प्राप्‍त जानकारी के अनुसार आईटीआई का नया कालेज प्रारंभ हुआ है इसमें पढ़ने वाले छात्रों के लिए छात्रावास का भी निर्माण करवाया जा रहा है। छात्रावास के लिए प्रशासकीय स्वीकृति की राशि 102.65 लाख रूपये है, तथा इसे बनाने का ठेका मेसर्स पीआर प्रोजेक्ट वर्ग डी ठेकेदार को दिया गया है और इस छात्रावास के कार्य पूर्णता की अवधि 30/10/2015 है। यह कार्य लोक निर्माण विभाग के संभाग धमतरी के तहत किया जा रहा है तथा इसकी देख रेख के लिए लोक निर्माण विभाग ने उप अभियंता श्रीमती रुपामणि चंद्राकर को नियुक्त किया है। बावजूद इसके छात्रावास निर्माण में बाल मजदूरों से काम लिया जा रहा है। नवीन आईटीआई छात्रावास में बाल श्रमिकों से काम करवाने की शिकायत मिलने पर यह संवाददाता उक्त निर्माण स्थल पर पहुंचा तो देखा गया कि निर्माण में 10 बाल श्रमिकों से कार्य लिया जा रहा था। पूछताछ करने पर ठेकेदार नदारद मिले जबकि सुपरवाईजर गुनी साहू ने इस मामले में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। स्‍थानीय पंचायत प्रतिनिधियों ने आईटीआई ठेकेदार द्वारा बच्चों से मजदूरी कराने की आलोचना करते हुए जांच कराने और साथ ही ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड करने की मांग की है। सरकार जहाँ बालश्रम पर सख्त कार्यवाही करने की बात करती है वहीं सरकार के नुमाइंदे सरकार की नाक के नीचे कानून व नियम की धज्जियां उड़ाते हुए खुलेआम बाल मजदूरी करा रहे हैं। बालश्रम कानून और शिक्षा के अधिकार कानून का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। और प्रशासनिक अमला आंखों पर पट्टी बांधकर बैठा हुआ है। इससे तो यही जाहिर होता है ठेकेदार और शासकीय अधिकारियों के बीच जोरदार सांठगांठ हो गई है। इसीलिए बीते कई दिनों से सरकारी छात्रावास के निर्माण में बाल मजदूरी कराई जा रही थी। 
 
ग्रामीणों से बातचीत करने पर पता चला कि इंजिनियर और ठेकेदार कभी कभार ही निर्माण स्थल पर आते हैं। पूरा निर्माण सुपरवाईजर के भरोसे पर किया जा रहा है। मतलब कि छात्रावास निर्माण का इंचार्ज, इंजीनियर, डिजाइनर और मालिक सब कुछ सुपरवाईजर गुनी साहू ही है। जय हो छत्तीसगढ़ की सरकार व सरकारी नुमाइंदों की जो छात्रावास की पूरी जिम्मेदारी सुपरवाईजर को देकर खुद चैन की बंशी बजाते हुए अपने कार्यालयों की कुर्सी तोड़ रहे हैं। जब ऐसी प्रक्रिया से निर्माण किया जाएगा तो जाहिर है कि यह छात्रावास बनकर तैयार होते होते ही इनमें कई दरारें पड़ जाएगी और शासकीय अधिकारी जांच की बात कहकर अपने कर्तव्यों को पूर्ण कर लेंगे, ठीक वैसे ही जैसे कि कई बड़े निर्माणों के बाद आज मरियल और खस्ताहाल स्थिति है। वैसे भी लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित बिल्डिंग, सड़क व अन्य की कितनी अच्छी स्थिति है इससे संभवतः प्रदेश समेत अन्य प्रदेश भी भलीभाँति परिचित है। लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित बिल्डिंग बनने के साथ ही भ्रष्टाचार का प्रमाण दे देती हैं, और सड़कें तो निर्माण कार्य पूरा होने के पहले ही भ्रष्टाचार के कई प्रमाण दे देती हैं मगर पीडब्ल्यूडी के मंत्री, सचिव और अधिकारियों को पूरी दुनिया में भ्रष्टाचार दिखाई देता है मगर पीडब्ल्यूडी में भ्रष्टाचार कभी भी नहीं दिखाई देता है। ऐसा क्यों है ? यह जांच का एक नया व रोचक विषय है और इस पर शोध भी किया जा सकता है।

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