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मंगलवार, 28 जुलाई 2015

यूपी - शित्रामित्रों के मामले इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजे, चीफ जस्टिस दो माह में फैसला लेंगे

नई दिल्ली 27 जुलाई 2015 (IMNB). सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में शिक्षक की भर्ती विवाद से शिक्षामित्रों का मामला अलग कर दिया है और उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट भेज दिया है। इस दौरान शिक्षामित्रों को शिक्षक के रूप में भर्ती करने पर रोक लगी रहेगी। जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ ने सोमवार को यह आदेश देते हुये इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से कहा कि वह एक पीठ का गठन करें और उसका नेतृत्व स्वयं करके दो माह में फैसला लें।
कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश लखनऊ में लंबित शिक्षामित्रों के केस भी इलाहाबाद स्थानांतरित करवा लें। वहीं कोर्ट ने टीईटी परीक्षा से जुड़ा मुद्दा अपने पास ही रख लिया और उस पर शिक्षा सचिव से विस्तृत जवाब देने का आदेश देते हुए 2 नवंबर के लिए मामला स्थगित कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि ज्यादातर राज्यों में टीईटी परीक्षा के साथ साथ शैक्षणिक योग्यता को भी देखा जाता है और उसके आधार पर ही मेरिट लिस्ट बनाई जाती है। यूपी में भी शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी के साथ साथ शैक्षणिक योग्यता को पैमाना बनाया गया था लेकिन हाईकोर्ट ने गत वर्ष इस नियम को रद्द कर दिया था और कहा था कि सिर्फ टीईटी के आधार पर ही मेरिट बनाई जाए। शैक्षणिक योग्यता को इसमें न लिया जाए क्योंकि सरकार ने रिक्तियों के विज्ञापन में योग्यता टीईटी पास ही रखी थी। इस फैसले के खिलाफ यूपी सरकार सुप्रीम कोर्ट आई है। इसके बाद कुछ छात्रों ने भी रिट याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की हैं। सोमवार को सुनवाई के दौरान प्रदेश के प्रमुख शिक्षा सचिव कोर्ट में पेश हुए थे। कोर्ट ने उनकी हाजिरी दर्ज की और उन्हें विस्तृत जवाब देने के लिए कहा। गौरतलब है कि कोर्ट ने 6 जुलाई को शिक्षामित्रों को शिक्षक के रूप में भर्ती करने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि शिक्षामित्र शिक्षक पात्रता परीक्षा, टीईटी पास नहीं हैं लेकिन सरकार उन्हें धड़ाधड़ शिक्षक के रूप में समायोजित कर रही है। हालांकि शिक्षामित्रों ने कहा कि उनकी भर्ती एनसीटीई के दिशा निर्देशों पर ही की गई है और एनसीटीई ने उन्हें टीईटी से छूट दी है। कोर्ट के फरवरी के आदेश के बाद सरकार ने 52 हजार से ज्यादा टीईटी पास शिक्षकों को भर्ती किया है। ये भर्तिंयां 72 हजार से ज्यादा रिक्तियों के एवज में की गई हैं।

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