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गुरुवार, 16 जुलाई 2015

रायपुर - विभाग व इंसपेक्टर की जांच में गलती पकड़ाई, 47 अवैध फैक्ट्रियों पर नहीं की गई कार्यवाई

रायपुर 16 जुलाई 2015 (जावेद अख्‍़तर). राजधानी रायपुर से सट कर उरला इंड्रस्ट्रियल एरिया में बीते दिनों  बोरझरा के बसुकीनाथ टायर टू आयल प्लांट में धमाका होने से तीन मजदूरों की जान चली गई थी । ब्लास्ट व मजदूरों की मौत के बाद शासन प्रशासन जागा, अब अवैध फैक्ट्री के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। जबकि सबसे बड़ा प्रश्न है कि दो सालों से यह अवैध फैक्ट्री कैसे संचालित हो रही थी। इससे फैक्ट्रियों के मापदंडों की जांच करने वाले तमाम विभागों की असलियत खुल गई है।
शासकीय विभाग के इंस्पेक्टर और अफसरों की कार्यप्रणाली कितनी चुस्त दुरुस्त है और धनबल व रसूख के दम पर कानून व नियमों की धज्जियां कैसे उड़ाई जाती है, अवैध फैक्ट्री का संचालन कई वर्षों से होना, इसका  सबसे बडा उदाहरण है। घटना के पश्चात विभागीय अफसर और इंसपेक्टर ने उरला क्षेत्र में तकरीबन 400 से ज्यादा फैक्ट्रियों में जांच पड़ताल की जिसमें 3 फैक्ट्रियों में कमी पाए जाने पर जुर्माना लगाया गया और इस प्रकार की लापरवाही की पुनरावृति न होने की सख्त हिदायत भी दी गई।

छत्तीसगढ़ में कुल रजिस्टर्ड फैक्ट्रियां
संभाग फैक्टरियां - रायपुर - 2121 दुर्ग - 751 बिलासपुर - 1618 कोरबा - 152 रायगढ़ - 305 राजनांदगांव - 437 कुल -- 4367 छत्तीसगढ़ प्रदेश में ऐसे लगभग 4367 छोटे-बड़े उद्योग संचालित हो रहें हैं। राज्य के अलग अलग हिस्सों में लगभग 200-250 उघोग अवैध रूप से चलाए जा रहे हैं। जिनमें से उरला में ही 47 अवैध फैक्ट्रियां अभी भी संचालित हो रही है। जबकि विभाग के अफसर कई दिनों से लगातार मानीटरिंग कर रहें हैं।

फैक्ट्रियों का संचालन 2-3 दिन के लिए रहा ठप्प
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दुर्घटना होने के बाद अपने बचाव में कई अवैध फैक्ट्रियों का संचालन 2-3 दिन के लिए ठप्प कर दिया गया था और फैक्ट्री के बाहर जाने वाले मेन गेट पर ताला लगा दिया गया था। बिजली व्यवस्था भी बंद कर दी गई थी। विभाग व पुलिस द्वारा जांच पड़ताल के बाद आज से सभी अवैध फैक्ट्रियां फिर से चालू कर दी गई है। 

नामी नेताओं की है अवैध फैक्ट्रियां
कुछ अवैध फैक्ट्रियां नामी नेताओं की है तो कुछ बड़े उघोगपतियों की है, इसीलिए विभाग व पुलिस जांच करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं जबकि उरला क्षेत्र के निवासियों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कई अवैध फैक्ट्रियां खुलेआम चलाई जा रही है और इन फैक्ट्रियों में बराबर विभाग व पुलिस का फेरा लगता ही रहता है। इसलिए विभाग के अफसर ये कहें कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है तो हास्यापद होगा। विभाग द्वारा जांच के पश्चात रिपोर्ट में बड़ी गलती पकड़ाई है। तो यक्ष प्रश्न ये है कि इस रिपोर्ट पर कितना विश्वास किया जा सकता है?

इन विभागों से लाइसेंस व अनुमति आवश्यक है
इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी - पर्यावरण बोर्ड - ग्राम पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका या स्थानीय निकाय - नगर तथा ग्राम निवेशक - जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र - विस्फोटक पदार्थ अधिनियम उरला की आयल फैक्ट्री ने विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी का लाइसेंस और पर्यावरण बोर्ड का भी लाइसेंस नहीं ले रखा था। जबकि ग्राम पंचायत, नगर निवेशक और जिला उद्योग केंद्र का लाइसेंस इस कंपनी के पास था। पुलिस की जांच में यह बातें सामने आई।

 सेफ्टी विभाग भी है जिम्‍मेदार
पुलिस की जांच से तथ्य सामने आता है कि आयल फैक्टरी में तीन मजदूरों की मौत के लिए सिर्फ फैक्ट्री संचालक ही जिम्मेदार नहीं है बल्कि सेफ्टी विभाग के अफसर व इंसपेक्टर, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत जांचकर्ता भी बराबर के जिम्मेदार है। फैक्ट्री के कुछ अंदरूनी लोगों से पूछताछ में पता चला है कि शासकीय विभाग के अफसर व इंस्पेक्टर को उरला क्षेत्र में संचालित प्रत्येक अवैध फैक्ट्री से अच्छी खासी रकम प्रति माह पहुँचाई जाती थी जिससे अवैध फैक्ट्रियां खुलेआम धड़ल्ले से चल रही थी।
  
इंडस्ट्रियल हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग के उपसंचालक एंथॉनी तिर्की से बातचीत के मुख्य अंश 
 
प्रश्न - यहाँ कि अधिकांश फैक्टरियों में सेफ्टी के जरूरी मापदंड का उल्लंघन पाया गया है तो विभाग क्या करता है?
उत्तर - कई फैक्टरियों में छापा मारकर कार्रवाई की गई है, दर्जनों फैक्टरी के खिलाफ लेबर कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया है तो कई को सजा भी हुई है। बासुकीनाथ फैक्टरी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।  

प्रश्न - उरला में अधिक फैक्टरियां हैं तो जांच बराबर होनी चाहिए थी बावजूद इसके लापरवाही कैसे हुई?
उत्तर - दरअसल उरला की फैक्टरी आयल मिल कारखाने के अंतर्गत आता है इसलिए यहाँ पर ज्वलनशील वस्तु बनाई जाती है। ऐसे में फायरप्रूफ जैकेट, हेलमेट और दस्ताने मजदूरों को दिया जाना था, लेकिन यही नहीं दिया था। फैक्ट्री की एक बड़ी लापरवाही थी, जिसकी वजह से तीन जानें चली गई।

प्रश्न - विभाग द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट में बड़ी गलती पकड़ाई है?
उत्तर - विभाग के अफसर और पुलिस विभाग द्वारा जांच पड़ताल की जा रही है, अगर कुछेक फैक्ट्रियां छूट गई होगी तो जल्द ही उस तक भी पहुंच जाएगी और कार्यवाही भी की जाएगी।

प्रश्न - आपके विभाग के कुछ अफसर और इंसपेक्टर को अवैध फैक्ट्रियों की पूरी जानकारी है?
उत्तर - अगर ऐसा है तो सभी से पूछताछ करता हूं, दोषी पाए जाने पर उन पर भी कानूनी रूप से कार्रवाई की जाएगी।

प्रश्न - अवैध फैक्ट्रियों में कुछ फैक्ट्रियां नामी नेताओं की भी है? क्या उन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की जाएगी? उत्तर - नामी नेता या हस्ती से कोई लेना देना नहीं है बस वैध अवैध की बात है, जो भी फैक्ट्रियां वैध है और मापदंडों पर खरी उतरती है सिर्फ वहीं फैक्ट्रियां संचालित होगी बाकी किसी की भी हो उस पर कार्रवाई करने में देरी नहीं की जाएगी। "

विशेषज्ञ की राय
उद्योग मंत्रालय के तमाम विभागों में जांच के लिए समन्वय क्यों नहीं? प्रदेश में जितनी भी फैक्टरी और उद्योग संचालित हैं, वो जिला उद्योग केंद्र, पर्यावरण बोर्ड, नगर निवेशक और उद्योग सुरक्षा व स्वास्थ्य विभाग से पंजीबद्ध होते हैं। अगर एक से भी लाइसेंस या पंजीयन नहीं लिया गया, तो इसका पता ही नहीं चलता। बताते हैं कि यहीं भ्रष्टाचार का खेल होता है और पैसों के लेन-देन के जरिए ऐसी फैक्टरियों पर कार्रवाई नहीं की जाती। लेकिन उद्योग मंत्रालय की बात करें, तो क्या इन विभागों में जांच के लेकर आपस में कोई समन्वय की व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई।

 उरला हादसे के घायलों को मिलेगी एक लाख की सरकारी मदद 
श्रम मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने राजधानी रायपुर स्थित अम्बेडकर अस्पताल परिसर में उरला औद्योगिक हादसे के तीनों मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। राजवाड़े ने अपनी ओर से तथा मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की ओर से इन परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति प्रकट की। उन्होंने अस्पताल परिसर में शव परीक्षण कक्ष के सामने तीनों परिवारों को फैक्टरी प्रबंधन की ओर से एक-एक लाख रूपए की तात्कालिक सहायता राशि का वितरण किया। राजवाड़े ने भिलाई नगर के सेक्टर-9 अस्पताल में दाखिल इस हादसे के घायल दो श्रमिकों से भी मुलाकात की और उनके जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उन्होंने अस्पताल के डॉक्टरों को इन घायलों का बेहतर से बेहतर इलाज करने के निर्देश दिए।

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