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सोमवार, 22 जून 2015

हड़ताल पर गए दिल्ली के सरकारी डॉक्टर, अस्पतालों के बाहर हंगामा

नई दिल्ली 22 जून 2015. केंद्र सरकार, नगर निगम और दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों के करीब 15 हजार रेजिडेंट्स डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है। डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पतालों में ओपीडी बंद होनेे से नाराज मरीजों व तीमारदारों ने जमकर हंगामा किया। इस बीच दिल्ली में रजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर दिल्ली सरकार ने आपात बैठक बुलाई है।
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने डाक्टरों से काम पर लौटने की अपील की है। पूर्वी दिल्ली के गुरुतेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल व लाल बहादुर शास्त्री (एलबीएस) अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया है। मरीजों के हंगामे के मद्देनजर एलबीएस अस्पताल प्रशासन ने मेन गेट बंद कर दिया। गेट पर सैकड़ों मरीज व तीमारदार डटे हुए हैं। कई अस्पतालों में डॉक्टरों को तीमारदारों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा। इन अस्पतालों के डॉक्टर तीमारदारों के चंगुल से किसी तरह बचकर निकले। इससे पहले सोमवार को सुबह दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के 15 हजार से अधिक डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से ओपीडी सेवा ठप रही। हड़ताल पर जाने का फैसला करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि दिल्ली के अस्पतालों में मरीजों, तीमारदारों के अलावा, डॉक्टर तक असुविधाओं से जूझ रहे हैं। हड़ताल पर जाने की सबसे बड़ी वजह यही है। डॉक्टरों की शिकायत है कि दिल्ली के आधे से अधिक सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए मशीनें व दवाइयां ही नहीं हैं। मरीजों व तीमारदारों की बात करें, तो इन अस्पतालों में पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है। साफ-सफाई का भी बुरा हाल है। इन सब असुविधाओं के लिए मरीज व तीमारदार डॉक्टरों को दोषी मानते हुए मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। पिछले दिनों डॉक्टरों की एसोसिशन ने शिकायती पत्र के जरिये कहा था कि पिछले पांच महीने से लिखित में मांगों का ज्ञापन दिया जा रहा है पर कोई सुनवायी नहीं है। इसी के साथ एसोसिएशन ने 22 जून से हड़ताल पर जाने की चेतावनी भी दी थी।

(IMNB)

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