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नेपाल में भूस्खलन से नदी में बना बांध, टूटने पर भारत में भी मच सकती है तबाही

काठमांडू 25 मई 2015. नेपाल में भूकंप के बाद हो रहे भूस्खलन बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहे हैं। शनिवार को काठमांडू के पास हुए बड़े भूस्खलन से काली गंडकी नदी का रास्ता रुक गया है। भारत में इस नदी को गंडक के नाम से जाना जाता है। भारी मलबा जमा होने की वजह से इस नदी में बड़ी सी झील बन गई है, जिसके टूटने पर भारत के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं।
नेपाल की राजधानी काठमांडू से लगभग 140 किलोमीटर दूर म्यागड़ी जिले के रामचे गांव में शनिवार रात भारी भूस्खलन हुआ। पहाड़ी से गिरे मलबे ने काली गंडकी नदी का रास्ता रोक दिया। नदी में एक झील बन गई है, जिसके टूटने पर नेपाल के साथ-साथ भारत के मैदानी इलाके भी बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। इसका सबसे ज्यादा खतरा बिहार में है। भारत में प्रवेश करने के बाद गंडक नदी कुछ किलोमीटर तक यूपी और फिर बिहार के मैदानी इलाकों से होकर करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करती है। यह पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, सारन और मुजफ्फरपुर जिलों से होकर गुजरती है। पटना के पास ही सोनपुर के हाजीपुर में गंगा में मिलती है। इसका विस्तार क्षेत्र 7,620 वर्ग किलोमीटर है। ऐसे में यह बांध अगर टूटता है, तो नदी के किनारे बसे इलाकों में भारी नुकसान हो सकता है। नेपाल के अधिकारियों ने भी नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए कहा है। प्रशासन ने नेपाल के परबत, स्यांगजा, गुलमी, पाल्पा, नवलपारासी और चितवन जिलों में लोगों को अलर्ट किया है। उनका भी यह मानना है बांध टूटने की स्थिति में यह नदी भारत में भी तबाही मचा सकती है। रविवार शाम 5 बजे के करीब यह बांध पूरी तरह भर गया और अब नदी का पानी उसके ऊपर से बहने लगा है। मगर खतरा अभी टला नहीं है। गौरतलब है कि नेपाल में 25 अप्रैल और 12 मई को आए भयंकर भूकंप के कारण कई भूस्खलन और हिमस्खलन हुये थे। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि भूकंप और उसके बाद आए आफ्टरशॉक्स की वजह से पहाड़ी ढलानें कमजोर हो गई हैं। ताजा भूस्खलन भी उसी का नतीजा बताया जा रहा है। 


(IMNB)