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मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

अशिक्षित जीवनसाथी मिलने पर विवाहिता ने मौत को लगाया गले

कानपुर। ‘पढे़ बेटिया बढे़ बेटिया‘ इस अभियान के चलते केन्द्र सरकार ने किशोरी से लेकर वृद्ध महिलाओं तक को शिक्षा दिलाकर समाज के साथ चलना और जीना सिखाया है। लेकिन एक नारी ने एक ऐसा कदम उठाया कि दो परिवारों ने अपनी बहू और बेटी को खो दिया, बात इतनी सी थी कि विवाहिता का जीवन साथी अशिक्षित था।
प्रश्न यह उठता है कि क्‍या समाज और शिक्षा ने हमें यही सिखाया है कि मुसीबत आने पर संघर्ष नहीं मौत को गले लगना उचित है। बताते चले कि कानपुर देहात के रसुलाबाद निवासी किसान रामशंकर ने अपनी 22 वर्षीय बेटी रिंकी की शादी चौबेपुर में रहने वाले सतीप्रसाद के बेटे अरविन्द कुशवाह से नौ महीने पहले की थी। शादी के बाद से दोनों घरों में एक खुशी का मौहाल चल रहा था। वहीं मायके पक्ष के लोग दामाद व ससुरालियों को एक अच्छा परिवार मान रहे थे। लेकिन मंगलवार की सुबह खेत में पति व सास-ससुर के जाने के बाद विवाहिता ने फांसी लगा ली। खेत में काम करने के बाद जल्दी ही वापस लौट ससुर सतीप्रसाद ने बहू का शव साड़ी के फंदे से पंखे के कुडे में लटका देखा। वह चीखते-चिल्लाते घर के बाहर निकला और आस पड़ोस के लोगों बुला लिया। पत्नी की अात्महत्या की जानकारी मिलने पर पति अरविन्द व अन्य परिवार के लोग भी आ गए। घर में रोना-पीटना शुरु हो गया। किसान ने घटना की जानकारी मायके पक्ष से लोगों को देते हुए सूचना पुलिस को भी दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और जांच पड़ताल शुरु कर दी। मौत की खबर पर मायके पक्ष के लोग भी आ गए और दामाद व ससुरालियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर बवाल करने लगे। पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को शांत कराया और शव को सीलकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एसओ का कहना है कि प्रथम दृष्टया जांच पड़ताल में यह जानकारी मिली है कि मृतका का पति अरविन्द कुशवाह अशिक्षित था। जिसके चलते विवाहिता ने यह कदमा उठाया है फिलहाल मामले की जांच पड़ताल की जा रही है।

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