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शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

निर्दोष या तस्कर ? मद्रास हाई कोर्ट ने रोकी संदिग्ध चंदन तस्करों की अंत्येष्टि

चेन्नै। मद्रास हाई कोर्ट ने आंध्र प्रदेश पुलिस के हाथों मारे गए 20 संदिग्ध चंदन तस्करों में से 6 लकड़हारों के शव की अंत्येष्टि शुक्रवार तक नहीं करने को कहा है। इनके बारे में कहा जा रहा है कि पुलिस ने इन्हें एक बस से जबरन उठाया था और बाद में चंदन तस्कर बताकर मार दिया। इस कथित एनकाउंटर को लेकर कई तरह के गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मद्रास हाई कोर्ट में तमिलनाडु के ऐडवोकेट जनरल एएल सोमयाजी ने कथित एनकाउंटर में मारे गए एक लकड़हारे सालिन की पत्नी ससीकुमार की तरफ से याचिका दाखिल की थी। यह मामला जस्टिस सत्यनारायणन के पास सुनवाई के लिए आया था। इसी सुनवाई में अंत्येष्टि रोकने की बात कही गई। बहस के दौरान जज ने कहा कि कोर्ट बिना एफआईआर के फिर से पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि घटना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर हुई है। सोमयाजी ने कोर्ट से कहा कि उन्हें फिर से पोस्टमॉर्टम पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार तक वह कोर्ट को इस मामले में और डिटेल सौंपेंगे। इसके बाद जज ने आदेश दिया कि अगले आदेश तक 6 शवों की अंत्येष्टि नहीं की जाए। आंध्र प्रदेश पुलिस ने चित्तूर जिले में एक रहस्यात्मक एनकाउंटर में 20 संदिग्ध लाल चंदन तस्करों को मार दिया था। दो मृतकों के परिवार वाले तमिलनाडु के तिरुवनामलाई जिले में सड़क पर बैठ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये इस मामले में स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग कर रहे हैं। इन परिवारों ने शवों की अंत्येष्टि से इनकार कर दिया है। चंदन तस्करी और पुलिस पर हमले के आरोप में मारे गए 20 लकड़हारों में 12 तमिलनाडु के हैं। तमिलनाडु सरकार का कहना है कि इनकी आंध्र पुलिस ने हत्या की है और ये चंदन तस्कर नहीं थे। तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सभी मृतकों के परिजनों को 3-3 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है। तमिलनाडु का कहना है कि ये मजदूर थे न कि चंदन तस्कर। आंध्र प्रदेश सिविल लिबर्टीज कमिटी ने दावा किया है कि एनकाउंटर में बच गया एक शख्स सामने आया है। यह आदमी उसी बस में था जिस बस से पुलिस पर सात लोगों को जबरन उठा ले जाने का आरोप है। यह आदमी किसी तरह फरार होने में कामयाब रहा था। पुलिस का दावा है कि संदिग्ध चंदन तस्करों के 100 लोगों ने उन पर पत्थरों और तीर से अटैक कर दिया और उन्हें अपनी जान बचाने के लिए जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन पुलिस की इस थिअरी पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। दक्षिण भारत के लाल चंदन से संपन्न जंगल में कोई पहली बार एनकाउंटर नहीं हुआ है। लेकिन चंदन तस्करों के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में एक एनकाउंटर में पहली बार लोग मारे गए हैं। इसके पहले युद्धस्तर पर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश ने मिलकर कोशिश की, लेकिन हताहतों की संख्या इतनी बड़ी नहीं थी।

(IMNB)

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