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मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

कानपुर - गैस्ट्रोलीवर हॉस्पिटल में मरीजों से हो रही अवैध वसूली

कानपुर। स्वरुप नगर स्थित गैस्ट्रोलीवर हॉस्पिटल में इलाज के नाम पर इन दिनों मरीजों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। स्‍थानीय पुलिस और कुछ तथाकथित पत्रकारों के संरक्षण के चलते हॉस्पिटल का स्टाफ और डॉक्‍टर बेख़ौफ़ होकर मरीजों को लूट रहे हैं और घटना की कवरेज हेतु आये पत्रकारों से भी अभद्रता करने से नहीं चूक रहे हैं।
प्राप्‍त जानकारी के अनुसार गैस्ट्रोलीवर हॉस्पिटल में उरई निवासी रजनी देवी को 29 मार्च को लीवर में हो रही समस्या के कारण भर्ती कराया गया था। 2 दिन तक इलाज करने के बाद मरीज की हालत नाजुक है कहकर डॉ0 वी. के. मिश्रा ने उन्हें आईसीयू में भेज दिया। जिसमें प्रतिदिन 8500 रु0 आईसीयू का चार्ज और 7 से 10 हजार प्रतिदिन की दवाई और इंजेक्शन गैस्ट्रो लीवर स्थित मेडिकल स्टोर से ही मंगाने लगे। जब रजनी के बेटे विपिन ने डॉ. वी के मिश्रा से बीमारी के बारे में पूछा तो उन्होंने केवल यह कहा की हालत नाजुक है ज्यादा दिमाग न लगाओ नहीं तो माँ मर जाएगी फिर पैसा रख के क्या करोगे। बकौल विपिन वो किसानी करता है 5 दिन में पैसा फूँककर टूट गया । कल विपिन से सुबह इंजेक्शन मंगाया गया जो गैस्ट्रोलीवर में 820 रु० का दिया गया विपिन ने जब वही इंजेक्शन हैलट के सामने स्थित माँ केमिस्ट एंड सर्जिकल से लिया तो उसे वो 350 रु० में मिला।
(हास्पिटल का पर्चा जिसमें दवा 820 की है)
जब विपिन ने जाकर वीके मिश्रा से इसकी शिकायत करनी चाही तो उन्होंने उससे कहा कि यहाँ से लेना हो तो लो नहीं तो मरीज को कहीं और ले जाओ और उसकी माँ को आईसीयू से बाहर करते हुए जबरन ये लिखवा लिया की अगर मेरी माँ को कुछ होता है तो मै स्वयं जिम्मेदार हूँ। विपिन ने रात में धमकियों से परेशान होकर कल 1 बजे 100 न० पर फोन कर पुलिस को बुलाया। लेकिन पुलिस से भी अस्‍पताल की सांठ - गांठ के चलते कोई हल नहीं निकला। जब स्‍थानीय साप्‍ताहिक समाचार पत्र एस.आर.न्यूज़ ने इस मामले को उठाया तो रात में ही मरीजों को वहां से भगाना शुरू कर दिया गया। जानकारी के अनुसार आज सुबह तक 5 मरीजों को वहां से रिफर कर भगाया जा चुका है। पत्रकारों ने इस बाबत जब गैस्ट्रोलीवर हॉस्पिटल के डॉ वी.के.मिश्रा से बात करनी चाही तो वहां के मैनेजर ने पत्रकारों से अभद्रता करनी शुरू कर दी।
(केमिस्‍ट का पर्चा इसमें दवा 350 की है)
मामला बढ़ने पर डॉ वी.के.मिश्रा ने कहा की हमारी थाने और पत्रकारों के एक स्‍वयंभू संगठन के अध्यक्ष से बात हो गयी है। बहुत देखे हैं तुम जैसे पत्रकार, जो करना हो कर लो मेरे खिलाफ कहीं कुछ नहीं छपेगा न ही कोई छापेगा। डॉ के बयानों से तो लगता है जैसे चंद कथित पत्रकारों और पुलिस के संरक्षण में ही मरीजों से लूट का ये गोरखधंधा चल रहा है और रोज इसी प्रकार से मरीजों को लूटा जाता है और फिर होता है लूट की रकम का बन्दर बाँट। जिसका एक हिस्सा तथाकथित संरक्षण देने वाले पत्रकारों और पुलिस को भी जाता है। शायद इसी लिये न तो पुलिस कोई कार्यवाही करती है और न ही तथाकथित पत्रकार नेताओं के दबाव में कोई समाचारपत्र इनके खिलाफ कुछ छापता है | उपरोक्त संरक्षण के कारण ही गैस्ट्रोलीवर हॉस्पिटल का स्टाफ और डॉ बेख़ौफ़ होकर मरीजों को लूट रहे हैं और पत्रकारों से भी अभद्रता करने से नहीं चूक रहे हैं। अब देखना ये है की प्रशासन क्या हॉस्पिटल के ऊपर कोई कार्यवाही करता है या फिर कथित पत्रकारों से संरक्षित ये हॉस्पिटल ऐसे ही फलता- फूलता रहेगा और  गरीब पिसते रहेंगे। 

(बलवन्‍त सिंह - सम्‍पादक एस.आर. न्‍यूज)


[Tags :- Dr. V.K. Mishra, Gastro Lever Hospital, Kanpur, Dalal Patrakar, Swaroop Nagar]

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