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राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी बीजेपी को भूमि अधिग्रहण बिल की चिंता

बेंगलुरु। भूमि विधेयक पर आलोचनाओं से घिरी बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भी यही मुद्दा छाया हुआ है। दो दिनों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शुरुआत शुक्रवार को भूमि अधिग्रहण बिल पर बुकलेट बांटने के साथ की गई। इस मौके पर पार्टी ने कहा कि वह इस पर बातचीत में किसानों को शामिल करने और विपक्ष द्वारा फैलाए गए 'भ्रम और दुष्प्रचार' को दूर करने के लिए व्यापक पैमाने पर संपर्क कार्यक्रम चलाएगी।
बीजेपी ने साथ ही कहा कि वह विपक्षी दलों और किसानों द्वारा सुझाए गए बदलावों के लिए भी तैयार है । शुक्रवार को शुरू हुई बीजेपी की दो दिनों की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली समेत कई नेता पहुंचे हैं। उद्घाटन भाषण में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 10 महीने के भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के लिए मोदी सरकार की तारीफ की। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे अभी से बिहार चुनाव की तैयारियों में जुट जाएं। गौरतलब है कि बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बीजेपी महासचिव पी मुरलीधर राव ने कहा कि पार्टी भूमि अधिग्रहण बिल के मुद्दे पर विचार मंथन करेगी और अगले महीने सत्ता में एक साल पूरा होने के मौके पर सरकार के अच्छे कार्यों के प्रचार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाएगी, जिससे कि सरकार के एक साल के अच्छे काम आम आदमी तक पहुंचाए जा सके। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'विपक्ष ने भूमि अधिग्रहण बिल के बारे में बहुत भ्रम फैलाया है और दुष्प्रचार किया है। हम इसके खिलाफ लोगों के पास जाएंगे।' बीजेपी नेता ने कहा, 'औद्योगिकीकरण आवश्यक है और हमें उद्योग तथा कृषि के बीच कोई संघर्ष नहीं दिखता। हम किसानों को एक पक्ष बना रहे हैं और उनके हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।' राव ने कहा कि भाजपा नेतृत्व पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि वह विपक्षी दलों और किसानों से वार्ता का इच्छुक है और विधेयक में बदलाव पर विचार किया है। उन्होंने कहा कि हम खुले दिमाग के साथ बात करना चाहते हैं। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के 111 सदस्यों के अलावा इस मीटिंग में सरकार के तमाम मंत्री, राज्यों के प्रभारी, अध्यक्ष और विशेष आमंत्रित सदस्य भी मौजूद हैं।

(IMNB)