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मंगलवार, 7 अप्रैल 2015

भारत का ऐंटि-मिसाइल टेस्ट हुआ नाकाम

नई दिल्ली। भारत के दसवें ऐंटि-मिसाइल टेस्ट को कामयाबी नहीं मिल सकी है। राजधानी दिल्ली जैसे महानगरों के लिए दुश्मन के मिसाइली हमले से बचाव के लिए सुरक्षा छतरी जल्द मुहैया कराने का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट इस टेस्ट पर निर्भर था। इसकी तैयारी 2006 में शुरू की गई थी। ओडिशा के वीलर आइलैंड से ऐंटि-मिसाइल की अडवांस्ड किस्म का सोमवार को परीक्षण किया गया। छूटने के कुछ सेकंड बाद ही पूरी मिसाइल बंगाल की खाड़ी में गिर गई।
रक्षा मंत्रालय और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन इस मामले पर मौन हैं। लेकिन सूत्रों ने बताया कि टेस्ट के दौरान अडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल (एएडी) का एक सबसिस्टम समुचित ढंग से काम नहीं कर सका। वैसे आंकड़ों के विश्लेषण के बाद सही कारणों का पता चलेगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अब तक दस टेस्ट कर चुका है जिसमें आठ कामयाब रहे हैं। सोमवार को हुए मिसाइल परीक्षण में निशाना एक इलेक्ट्रॉनिक टारगेट मिसाइल थी, जबकि अप्रैल के अंत में ही एक और परीक्षण कर वास्तविक वॉरहेड वाली दुश्मन की मिसाइल छोड़ी जाएगी। इस तरह यह परीक्षण युद्ध जैसे वास्तविक माहौल में होगा। इस तरह के इंटरसेप्टर मिसाइल को बड़े शहरों की सुरक्षा के लिए तैनात करने की तैयारी नौ साल पहले 2006 में शुरू की गई थी। इसमें इस्तेमाल होने वाले रडार का विकास इस्राइली सहयोग से किया गया है। शुरू में भारत ने इस्राइल से दो ग्रीनपाइन रडार आयात किए थे, जिसकी तर्ज पर डीआरडीओ ने स्वोर्डफिश रेडार का विकास किया है। मिशन में अब तक 40 किलोमीटर से नीचे की ऊंचाई पर दुश्मन की मिसाइल को गिराने के लिए छह एंडो एटमॉस्फेरिक टेस्ट हो चुके हैं जबकि 80 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई वाले तीन एग्जो-एटमॉस्फेरिक टेस्ट हो चुके हैं। कुल दस में से अब तक आठ टेस्ट सफल हो चुके हैं। दसवां टेस्ट अडवांस्ड किस्म का बताया जा रहा था जिसमें वॉरहेड बड़ा लगाया गया था। दुश्मन की मिसाइल के छूटने के बाद इसकी चेतावनी मिलने के बाद छूटने से लेकर टकराने तक की सारी प्रक्रिया स्वचालित होती है। यह दसवां परीक्षण एंडोएटमॉस्फेरिक मिसाइल का था। भारत की योजना दो चरणों वाली बैलस्टिक मिसाइल रक्षा योजना विकसित करने की है। इसका उद्देश्य देश के बड़े शहरों को बैलिस्टिक मिसाइली हमले से बचाना है। पहले चरण की योजना में दो हजार किलोमीटर दूर से आ रही बलिस्टिक मिसाइलों के हमले से बचाव की तकनीक विकसित की जा रही है जबकि दूसरे चरण की ऐंटि-मिसाइल में दो से पांच हजार किलोमीटर दूर से आ रही मिसाइल के हमले से बचाव की तकनीक विकसित की जा रही है। टेस्ट का मकसद दसवां ऐंटि-मिसाइल टेस्ट सोमवार दोपहर के पहले किया गया। टेस्ट की योजना एक इलेक्ट्रॉनिक टारगेट को नष्ट करने के इरादे से बनाई गई थी। इससे यह सिद्ध होता कि मिसाइल पहले की किस्म से भारी वजन वाला वॉरहेड ले जा सकती है। दुश्मन की हमलावर मिसाइल से आसमान में टकराने के लिए इसे और अधिक सटीक निशाने वाला बनाया गया था।

(IMNB)

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