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बुधवार, 22 अप्रैल 2015

ब्लैक मनी पर मोदी सरकार ने इंडस्ट्री लॉबी और सांसदों के दबाव को ठुकराया

नई दिल्ली 22 अप्रैल 2015. ब्लैक मनी पर मोदी सरकार ने इंडस्ट्री लॉबी ग्रुप्स के साथ कुछ सांसदों के दबाव को ठुकरा दिया है। सरकार की तरफ से लागू किए गए अहम कदमों को कमजोर करने के लिए इन्होंने संपर्क किया था। इनमें एक लाख से ऊपर के लेन-देन पर पैन नंबर का इस्तेमाल और ब्लैक मनी बिल शामिल हैं। इनकी घोषणा बजट में इकॉनमी में नाजायज फंड को रोकने के लिए की गई थी। बड़े पैमाने पर नकद लेन-देन करने वाले कई सेक्टर्स के प्रतिनिधियों ने मंत्रियों से संपर्क कर एक लाख से ऊपर के हर ट्रांजैक्शन पर परमानेंट पैन नंबर देने को खत्म करने की मांग की थी।
ऐसे कई सेक्टर्स हैं जो कि ब्लैक मनी संग्रह के लिए जाने जाते हैं और इनमें नकद लेन-देन ही प्रमुख हैं। इकॉनामी में नाजायज नकदी की मौजूदगी का प्रभाव अन्य सेक्टर्स पर भी पड़ता है। इनमें कैश के जरिए टिकाऊ वस्तुओं और लग्जरी आइटम्स की खरीदारी शामिल है। स्थानीय अर्थव्यवस्था में ब्लैक मनी को रोकने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रियल एस्टेट डील्स में 20,000 से ऊपर के अडवांस पेमेंट को बैन करने का प्रस्ताव रखा है। तर्क दिया जा रहा है कि इसका आर्थिक विकास और रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा क्योंकि डिमांड प्रभावित होगी। हालांकि सरकार के सूत्रों का कहना है कि ये कदम इकॉनामी में ब्लैक मनी के प्रसार को रोकने के लिए उस अनिवार्य प्लान का हिस्सा है जिसमें बीजेपी ने चुनावी वादे किए थे। इन दोनों प्रस्तावों के खिलाफ एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि उन उपभोक्ताओं के लिए यह मुसीबत है जिनके पास पैन कार्ड नहीं हैं। भारत में ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं जिनके पास पैन कार्ड नहीं है। सरकार इन तर्कों के मुकाबले में कह रही है कि जन-धन योजना की तर्ज पर सरकार पैन कार्ड के लिए भी एक अभियान चलाएगी। जिस तरह देश भर में सभी परिवारों के बैंक अकाउंट खुल गए उसी तरह पैन कार्ड भी बन जाएंगे। दूसरी चिंता है विदेशों में छुपाए गए धन पर संसद द्वारा हाल ही में पेश किया गया ब्लैक मनी बिल है। सूत्रों का कहना है कि सत्ताधारी पार्टी के अलावा अन्य पार्टियों के सांसद ब्लैक मनी बिल को कमजोर करने के लिए लॉबीइंग कर रहे हैं। विदेशों में छुपाए धन का खुलासा नहीं करने पर या इसे पनाह देने पर 10 साल की कैद को ये सांसद खत्म कराना चाहते हैं। सरकार के सूत्रों ने बताया कि कुछ सांसदों ने इस बिल को सिलेक्ट समिति के पास भेजने की सलाह दी है ताकि कड़े नियमों को कमजोर किया जा सके। पैन नंबर से अलग इसके बारे में तर्क दिया जा रहा है कि असंगठित सेक्टर्स प्रभावित होंगे। बड़ी संख्या में उद्योगपतियों ने ब्लैक मनी बिल के बारे में शिकायत की है। इनका कहना है कि टैक्स अथॉरिटीज को इसके जरिए अकूत शक्ति प्रदान की गई है जिसका ये दुरुपयोग भी कर सकते हैं। पर सरकार का कहना है कि उत्पीड़न के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा कवच हैं।

(IMNB)

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