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शुक्रवार, 24 अप्रैल 2015

मरते 'गजेंद्र' को न मनमोहन रोक पाए, न मोदी रोक पा रहे हैं

नई दिल्ली 24 अप्रैल 2015. राजस्थान निवासी गजेंद्र सिंह ने बुधवार को दिल्ली में खुदकुशी कर ली। इसके बाद से देश का सियासी पारा चढ़ गया है।1995 से देश में किसानों की आत्महत्या जारी है लेकिन न तो एनडीए सरकार ने और न ही यूपीए ने इस मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया। आंकड़ों के मुताबिक 1995 से अब तक 2,97, 056 किसानों ने अपनी जान ले ली।
नैशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक राजस्थान किसानों की खुदकुशी के मामले में महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश से काफी पीछे है। भारत में साल 2013 में कुल 11,772 किसानों ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली। इनमें से राजस्थान के 292 किसान थे। किसानों की आत्महत्या के मामले में राजस्थान दसवें नंबर पर है। 2013 में महाराष्ट्र से 3,146 किसानों ने आत्महत्या की। यह पिछले 15 सालों का चौंकाने वाला आंकड़ा है। इसी साल आंध्र प्रदेश में 2,104, कर्नाटक में 1,403 और मध्य प्रदेश में 1,090 किसानों ने खुदकुशी की। देश में जितने किसान खुदकुशी कर रहे हैं उनमें से दो तिहाई इन चार राज्यों से हैं। सिर्फ छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल दो ऐसे राज्य हैं जहां इस साल किसी किसान ने खुदकुशी नहीं की। देश में हर साल एक लाख से ज्यादा संख्या में आत्महत्याएं दर्ज की जाती हैं। 2013 में अकेले भारत में 1,34,799 लोगों ने आत्महत्या की। इनमें 8.7% किसान हैं। राजस्थान में एक साल में 4,860 खुदकुशी हुई जिनमें से 292 किसान हैं और 25 महिलाएं। खुदकुशी के पैटर्न से पता चलता है कि साल 2013 में देश भर में किसानों ने आत्महत्या की और इनमें सभी उम्र के लोग हैं। यहां तक कि तेरह से उन्नीस तक की उम्र वाले भी लोग हैं। 22 आत्महत्याएं तो 0-14 साल के बीच की हैं। 15-29 साल के 2,805 किसानों ने आत्महत्याएं कीं। 30-44 साल के बीच 4,274 किसानों ने अपनी जान ले ली। 3,307 वैसै किसानों ने खुदकुशी की जिनकी उम्र 45 से 59 के बीच थी और 60 से ऊपर की उम्र में आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या 1,364 है। राजनीतिक पार्टियों ने कई सालों तक इस मुद्दे पर बोलने के अलावा भुगतान करने पर ध्यान नहीं दिया। 1995 से देश में किसानों की आत्महत्या जारी है लेकिन न तो एनडीए सरकार ने और न ही यूपीए ने इस मामले को गंभीरता और संवेदनशीलता से लिया। आंकड़ों के मुताबिक 1995 से अब तक 2,97, 056 किसानों ने अपनी जान ले ली। एनसीआरबी इन आत्महत्याओं की वजह नहीं बताता है। इन आत्महत्याओं को अक्सर फसल की बर्बादी और नाकामी, कर्ज, सिंचाई का अभाव, कम उत्पादन, लागत से कम कीमत, निराशाजनक दाम और मंहगी होती खेती से जोड़कर देखा जाता है। किसानों की आत्महत्या का मुद्दा राजनीतिक पार्टियां चुनावों में प्रमुखता से उठाती हैं लेकिन ज्यादातर राज्यों में यह समस्या अभी भी कायम है। गजेंद्र सिंह की आत्महत्या पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बयान जारी कर अपनी चिंता जतायी। उन्होंने कहा, 'इस समस्या का समाधन तलाशने के लिए हमें संकल्प लेना चाहिए। सरकार सभी तरह के सुझावों को स्वीकार करेगी। सभी राजनीति दलों को समाधन खोजने के लिए साथ मिलकर काम करने की जरूरत है।'

(IMNB)

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