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गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

मदद की आस में धीमी मौत की ओर बढ़ रहे हैं नेपाल के ग्रामीण

गुरखा/बरपक । नेपाल में आए भूकंप के केंद्र रहे बरपक और गुरखा के गांववाले अब धीमी मौत की ओर बढ़ रहे हैं। ये इलाके पूरी तरह कट गए हैं। भूकंप और भू-स्खलन से सड़कें टूट गई हैं और ज्यादातर गांवों में हेलिकॉप्टर उतरने की जगह नहीं है।इन गांवों में बचाव का कोई काम नहीं किया जा रहा. सिर्फ राहत पहुंचाई जा रही है। भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टर गांवों में ऊपर से भोजन, टैंट और कंबल आदि जैसी जरूरी चीजें गिरा रहे हैं। जब तक हेलिपैड या सड़कों का निर्माण नहीं हो जाता, उन लोगों को वहां से निकाल पाना संभव नहीं होगा। बुधवार को भारतीय वायु सेना ने बरपक के एक गांव में राहत सामग्री पहुंचाई।
100 के करीब घरों वाला यह गांव भूकंप में बुरी तरह तबाह हो गया है। हेलिकॉप्टर को उतारने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया।नेपाली सेना के कैप्टन नरेश खडका का कहना है, 'हम यह भी नहीं जानते कि गांव में कितने लोगों की मौत हुई है या कितने घायल हैं। कुछ लोग अब भी मलबे के नीचे जिंदा दबे हो सकते हैं। लेकिन हम उन्हें बचाने की हालत में नहीं हैं। वे मदद के इंतजार में ही मर जाएंगे। जब बचाव दल का कोई व्यक्ति कुछ न कर पा रहा हो, तो बहुत बुरा लगता है।' खडका बरपक में भारतीय वायु सेना के बचाव दल की मदद कर रहे हैं।भूकंप का असर 80 लाख नेपालियों पर पड़ा है। इनमें से 14 लाख को फौरन सहायता पहुंचाने की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र के फूड प्रोग्राम से जुड़े एक अधिकारी ने एपी से कहा था कि ऐसा एक रात में नहीं हो सकता।नेपाल पुलिस ने बुधवार को कहा कि मरने वालों की संख्या 5045 तक पहुंच चुकी है। माउंट एवरेस्ट की ढलानों पर 19 अन्य के मारे जाने की खबर है। चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने तिब्बत में 25 लोगों के मारे जाने की खबर दी है। पुलिस ने कहा है कि इस विध्वंसकारी भूकंप में 10 हजार से ज्यादा लोग घायल भी हुए हैं और हजारों बेघर हो गए हैं।भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर सुगम स्थानों पर टीमें उतार रही हैं जहां से ऐसे गांवों तक पहुंचेंगी जहां पहुंच पाना संभव नहीं है। इसके बाद वे घायलों को इन स्थानों पर लाएंगी, ताकि वहां से उन्हें निकाला जा सके। गुरखा में उतारी गई एक टीम ने काम करना शुरू भी कर दिया है। विंग कमांडर अभिजीत बाली का कहना है, 'हम अब पैदल ही सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों तक पहुंचने की कोशिश कर यह देखने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या गिरे मकानों को हटाकर वहां हेलिपैड बनाया जा सकता है। 


 (IMNB)

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