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सोमवार, 23 मार्च 2015

पीएम मोदी के प्रोजेक्‍ट को कॉर्पोरेट का 1,000 करोड़ दान

नई दिल्ली। पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के प्रति भारत के उद्योग जगत ने काफी दरियादिली दिखाई है। पीएम मोदी के क्लीन इंडिया के प्रॉजेक्ट के लिए कॉर्पोरेट जगत ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक दान दिया है।
स्वच्छ भारत से संबंधित प्रॉजेक्ट्स को अपना बजट समर्पित करने वाले बड़े कॉर्पोरेट हाउसों में एलऐंडटी, वेदांता, भारती, टीसीएस, अंबुजा सीमेंट्स, टोयोटा किरलोस्कर, मारूती, टाटा मोटर्स, कोका कोला, डाबर, रेकिट बेनजीकर, आदित्य बिड़ला ग्रुप, अडाणी, बायॉकॉन, इंफोसिस, टीवीएस एवं अन्य शामिल हैं। इन प्रॉजेक्ट्स के तहत स्वच्छता से संबंधित कई काम हैं जैसे दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में शौचालय बनवाना, लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए कार्यशाला चलाना, कचरा प्रबंधन से लेकर जल एवं वातावरण की स्वच्छता आदि। इनमें से अधिकतर प्रॉजेक्ट्स के लिए उनलोगों ने दान अपनी कॉर्पोरेट समाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) मद से दिया है लेकिन कुछ प्रॉजेक्ट्स के लिए अलग से भी दान दिया गया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार की यह पहल कॉर्पोरेट जगत को दोहरा फायदा करा रही है। एक ओर इससे उनको सीएसआर में 2 फीसदी अनिवार्य निवेश करने का मौका मिल रहा है तो दूसरी ओर सरकार की नजर में उनकी अहमियत बढ़ रही है। केपीएमजी के टेक्निकल डायरेक्टर, सस्टेनिबिलिटी अडवाइजरी संतोष जयराम ने बताया, 'जैसे ही पीए ने इस अभियान का आह्वान किया वैसे ही शुरू में तो लोगों ने झाड़ू अपने हाथ में थाम ली और कुछ कंपनियों ने अपने कर्मचारियों से इस अभियान में शामिल होने का आह्वान किया।' इसके बाद कई कंपनियों ने इसे हकीकत का रूप देने के लिए धीरे-धीरे खास प्रॉजेक्ट और बजट तैयार करके इसे अपना मिशन बना लिया। उदाहरण के लिए, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और भारतीय एंटरप्राजेज का एक अंग भारती फाउंडेशन, दोनों ने स्कूलों में टॉयलट बनवाने के लिए अपने सीएसआर के रूप में 100-100 करोड़ रुपये इस अभियान को समर्पित कर दिया। इसके तहत टीसीएस ने देश के 10,000 स्कूलों में छात्राओं के लिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सुविधा के लिए फंड देने की योजना बनाई और भारती ने लुधियाना को गोद ले लिया है और इसे खुले में शौच से मुक्त जिला बनाने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स (पीडब्लूसी) के पार्टनर सुधीर सिंह ने बताया, हालांकि ज्यादातर कंपनियों ने अभी तक टॉइलट्स बनवाने पर ही अपना ध्यान केंद्रित कर रखा है लेकिन कुछ अन्य कंपनियां हैं जिन्होंने कचरा प्रबंधन, पानी की सफाई और अन्य इनोवेटिव प्रॉजेक्ट्स को अपनाया है। उदाहरण के लिए डीएलएफ ने गुड़गांव के आसपास के गांवों में कचरा प्रबंधन प्रोग्राम पर काम शुरू किया है। इस प्रॉजेक्ट के तहत जिसके लिए फंड सीएसआर के तहत दिया गया है, कंपनी ने कचरा उपचार संयंत्र और कचरा संग्रहण आधारिक संरचना का निर्माण कराया है। निर्मित सुविधाओं को ग्राम पंचायत के हवाले कर दिया गया है जो मार्केट में कंपोस्ट बेचकर कमाई कर रहा है। डीएलएफ फाउंडेशन के सीईओ राजेंद्र सिंह ने बताया, 'साफ-सफाई हम सभी की जिम्मेदारी है, न कि सिर्फ सरकार की। स्वच्छ हरियाणा अभियान में डीएलएफ फाउंडेशन का योगदान उस समस्या के समाधान की दिशा में एक प्रयास है जो देश के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है।

(IMNB)

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