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कोलगेट मामला : ऑफिसर के कन्नी काटने से मायूस थे मनमोहन

नई दिल्ली। कोयला घोटाले में सीबीआई की जांच का सामना कर रहे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उपेक्षित तो महसूस कर ही रहे थे, लेकिन उस समय उन्हें गहरा झटका लगा जब पीएमओ में करीबी रहे एक अधिकारी ने न तो उनका फोन उठाया और न ही पलटकर फोन किया। यह अधिकारी मनमोहन सिंह के कार्यकाल में उन्हें रिपोर्ट करता था और कहता था कि आपकी वजह से ही मैं इस शीर्ष ऑफिस में हूं।
सूत्रों ने बताया, मनमोहन सिंह ने इस अधिकारी को हिंडाल्को को तालाबीरा कोल ब्लॉक आवंटित करने को लेकर 17 जनवरी को सीबीआई की पूछताछ से ठीक पहले फोन किया था। बताया जाता है कि पूर्व प्रधानमंत्री सीबीआई की टीम का सामना करने से पहले इस मामले में ताजा घटनाक्रम की जानकारी हासिल करना चाहते थे। सूत्र का कहना है कि पूर्व सहायक द्वारा इस तरह की बेरुखी के बाद मनमोहन के मन में शंका घर कर गई होगी कि उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा। मनमोहन सिंह के मन में असुरक्षा की भावना और सीबीआई की पूछताछ को लेकर उनके अनुभव के चलते ही कांग्रेस गांधी सोनिया गांधी को मार्च निकालकर उन्हें आश्वस्त करने पर मजबूर होना पड़ा कि इस कठिन समय में पूरा संगठन मजबूती से आपके साथ खड़ा है। सूत्र का कहना है कि गुरुवार सुबह पार्टी मुख्यालय से अपने सभी प्रमुख नेताओं और सांसदों के साथ मनमोहन सिंह के आवास तक मार्च का फैसला सोनिया गांधी का ही था। हालांकि, कांग्रेस अध्यक्ष का पूरी पार्टी के साथ आधे किलोमीटर के इस पैदल मार्च के लेकर विश्लेषक और पार्टी के नेता भी हैरान हैं। इन्हें लगता है कि एक नेता को सहज करने के लिए पार्टी की ओर से जरूरत से ज्यादा प्रयास किया गया। कोयला ब्लॉक आवंटन में बुधवार को आरोपी के तौर पर मनमोहन को कोर्ट का समन जारी होने के पीछे कांग्रेस के मैनजरों को पीएमओ के उस अधिकारी का रुख भी जिम्मेदार लगता है। इस अधिकारी ने सीबीआई को दिए बयान में कहा कि कोयला ब्लॉक आवंटनके मामले में पूर्व प्रधानमंत्री ही अंतिम रूप से फैसला लेते थे। उन्होंने यह भी बयान दिया कि कोयला सचिव की ओर से भेजी गईं फाइलों को पूर्व पीएम बारीकी से देखते थे।

(IMNB)