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चीन के बढ़ते और अमेरिका के घटते प्रभुत्व का संकेत

नई दिल्ली। क्या वाकई में अमेरिका का दुनिया पर दबदबा घट रहा है? स्थिति कुछ ऐसी ही नजर आ रही है, क्योंकि अमेरिका के कई साथी देश चीन के नेतृत्व वाले नए अंतरराष्ट्रीय बैंक में शामिल हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का उल्लेख किया गया है कि इस संस्था से बाहर रखने के वॉशिंगटन के दबाव नहीं मानने वाले अमेरिका के करीबी मित्र राष्ट्रों की संख्या बढ़ती जा रही है।
इस पर एक सीनियर अमेरिकी राजनयिक ने कहा कि इस संस्था में शामिल होने या न होने को लेकर फैसला देशों को करना है। फाइनैंशल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने ब्रिटेन का अनुसरण करते हुए एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) को जॉइन किया है जिससे वॉशिंगटन को बड़ा झटका लगा है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि दक्षिणी कोरिया, स्विटजरलैंड, लक्‍समबॉर्ग भी इसमें शामिल होने पर गौर कर रहे हैं। यूरोपीय अधिकारियों का हवाला देते हुए फाइनैंशन टाइम्स ने उल्लेख किया कि एआईआईबी में शामिल होने का 4 देशों का फैसला वॉशिंगटन के लिए बड़ा झटका है। वॉशिंगटन ने पूछा है कि क्या नए बैंक में उच्च स्तरीय शासन एवं पर्यावरणीय तथा सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी? इस बैंक को इस क्षेत्र में चीन के पावर को बढ़ाने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे संभवतः अमेरिका का नुकसान होगा। मंगलवार को पूर्वी एशिया के वॉशिंगटन के शीर्ष राजनयिक ने यह संकेत दिया कि एआईआईबी को लेकर चिंता बरकरार है लेकिन इसमें शामिल होने या न होने को लेकर फैसला तो हर राष्ट्र को ही करना है। पिछले साल पेइचिंग में एआईआईबी को लॉन्च किया गया था जिसका मकसद परिवहन, ऊर्जा, दूरसंचार और अन्य आधारिक संरचना में निवेश को बढ़ावा देना था। इसे पश्चिमी जगत के प्रभुत्व वाले वर्ल्ड बैंक और एशियन डिवेलपमेंट बैंक के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा गया। चीन ने बताया कि इस साल के आरंभ में 26 देश इसके संस्थापक सदस्यों के रूप में शामिल हुए जिनमें से अधिकतर एशिया और मध्य पूर्व एशिया के देश हैं। इसने इस साल के अंत में अनुबंधों के अनुच्छेदों को अंतिम रूप देने की योजना बनाई है। हालांकि जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी कोरिया इससे अभी दूर हैं लेकिन वीकएंड में प्रधानमंत्री टॉनी ऐबट ने कहा कि वह जल्द ही एआईआईबी की सदस्यता पर निर्णय लेंगे। दक्षिणी कोरिया ने कहा है कि वह संभावित भागीदारी के बारे में चीन एवं अन्य देशों से बात कर रहा है। चीन के मुख्य प्रतिद्वंद्वी जापान की एशियन डिवेलपमेंट बैंक (एडीबी) में भारी हिस्सेदारी है और मनीला स्थित इस बैंक की कमान एक जापानी के हाथ में है। जापान की चीन नीत बैंक में शामिल होने की संभावना कम ही है लेकिन एडीबी के प्रमुख ने कहा है कि दोनों संस्थाएं एक-दूसरे का सहयोग करेंगी।

(IMNB)