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मंगलवार, 31 मार्च 2015

PMO ने पूछा ट्रेनें लेट क्यों, रेलवे इमर्जेंसी में खोज रहा है जवाब

नई दिल्ली। ट्रेनों की लेटलतीफी पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जवाब तलब किए जाने के बाद रेलवे पुरानी फाइलों में इसका समाधान खोज रहा है। रेलवे के अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आपातकाल के दौरान कैसे ट्रेनें समय से चलती थीं।
रेलवे के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'हमें बताया गया है कि आपातकाल के दौरान ट्रेनें समय से चलती थीं। हम पुरानी फाइलें निकालकर ट्रेनों के समय पर चलने के पैटर्न के बारे में स्टडी कर रहे हैं। पुराने रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि उस समय करीब 90% ट्रेनें समय से चल रही थीं।' सूत्र ने बताया, 'यह सारी कवायद हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ट्रेनों की लेटलतीफी के बारे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु से किए गए सवाल के बाद की जा रही है। मोदी ने यह भी पूछा था कि समय से चलने वालीं ट्रेनों की संख्या लगातार घट क्यों रही है। रेलवे के अधिकारियों को बताया गया कि पीएमओ को सांसदों, मंत्रियों और आम नागरिकों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि ट्रेनें समय पर नहीं चलती हैं। इन शिकायतों को रेल मंत्रालय को बढ़ा दिया जाता है। इनमें से कई ने सवाल किया है कि आपातकाल के समय में ट्रेनें कैसे समय पर चला करती थीं। पीएमओ के हस्तक्षेप के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु हर दिन का ब्योरा ले रहे हैं। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में ऐसा करने वाले वह पहले मंत्री हैं। इस महीने रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैफिक) अजय शुक्ला ने सभी जोनों को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी है कि आंकड़ों के बारे में गलत रिपोर्टिंग न की जाए। सेंट्रल कोचिंग ऑपरेशंस इन्फर्मेशन सिस्टम में मैनुअली गलत इन्फर्मेशन डालने पर ऐसा किया जा सकता है। एक तरह से इस चिट्ठी से यह साफ होता है कि अब तक आंकड़े गलत दिए जाते रहे हैं। लेटर में लिखा गया है कि ऐसा करने पर सस्पेंशन, इंटर जोनल ट्रांसफर और अनुशासनात्मक कार्रवाई भी जाएगी। यह ऐक्शन जोनल चीफ पैसंजर ट्रैफिक ऑफिसर तक के अधिकारियों पर की जाने की बात कही गई है। अब आंकड़ों पर नजर डालें, तो लेटलतीफी तेजी से बढ़ती हुई दिख रही है। रेल भवन के अधिकारियों का मानना है कि ऐसा इसलिए दिख रहा है, क्योंकि अब डेटा डालने में कम गड़बड़ हो रही है। मार्च 2014 में जहां ट्रेनों की पाबंदी 84.43 फीसदी दर्ज की गई थी, वहीं इस साल मार्च में यह 79 पर्सेंट ही है। जोनल रेलवेज़, जैसे कि उत्तर रेलवे में तो पाबंदी के आंकड़े 82 फीसदी से गिरककर 60 फीसदी पहुंच गए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस आंकड़े में और गिरावट देखने को मिल सकती है। ट्रेनें वक्त पर चलें, यह देखने वाले ट्रैफिक निदेशालय ने कहा है कि उपकरण वगैरह खराब होने की वजह से कई बार देरी हो जाती है, मगर इंजिनियरिंग विभाग वाले इस तरह की घटनाओं को सही तरीके से रिपोर्ट नहीं करते। एक अधिकारी ने कहा, 'इतने सालों तक उपकरण वगैरह खराब होने से होने वाली देरी के डेटा को छिपाया जाता रहा है। अब ऐसा नहीं हो सकेगा।'

(IMNB)

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