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गोमांस पर प्रतिबंध से मेडिकल केयर पर पड़ेगा असर ?

नई दिल्ली। गोमांस पर प्रतिबंध की मांग कर रहे लोगों को यह कड़वी सच्‍चाई पचाने में मुश्किल हो सकती है कि पशुओं को सिर्फ गोमांस खाने वालों के लिए नहीं मारा जाता, बल्कि दवा उद्योग की जरूरतों के लिए भी ऐसा किया जाता है। दवाओं के कैप्सूल, विटामिन की दवाओं और चिकन के चारे में इस्तेमाल होने वाले जेलेटिन को जानवर की हड्डियों और चमड़े की प्रोसेसिंग से बनाया जाता है।
एक फार्मा कंपनी के सीनियर ऐग्जिक्युटिव ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, 'किसी न किसी रूप में हम अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में गोमांस कन्ज्यूम करते ही हैं।' इंडिया में ज्यादातर जेलेटिन मेकर्स का कहना है कि वे इसे बनाने में भैंस की हड्डियों का उपयोग करते हैं, लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा में गोवध विरोधी कानूनों को देखते हुए कंपनियों को आने वाले दिनों में परेशान किए जाने का डर सता रहा है। केरल की निट्टा जेलेटिन इंडिया लिमिटेड के एमडी संजीव मेनन ने कहा, 'हम भैंस की हड्डियों का इस्तेमाल करते हैं। इसकी पहचान के लिए हमारे पास एक सिस्टम है। मसला यह है कि जो लोग हमारे पास हड्डियां भेजते हैं, वे नंगी आंख से देखकर यह तय नहीं कर सकते कि वे भैंसों की हड्डियां हैं या गायों की। अगर किसी ने बवाल खड़ा कर दिया तो हमारी इंडस्ट्री प्रभावित होगी।' यह कंपनी केरल सरकार और जापान की निट्टा लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है। कंसल्टिंग फर्म ग्लोबल ऐग्री सिस्टम के अनुसार, भारत में सालाना करीब 21 लाख टन कैटल बोन जेनरेट होती है। इसके दम पर भारत जेलेटिन का प्रमुख निर्यातक बना हुआ है। निट्टा के कारखाने गुजरात में हैं। गुजरात जेलेटिन बनाने का प्रमुख केंद्र है। इंडिया में 5,000 करोड़ रुपये की कैप्सूल इंडस्ट्री बड़ी मात्रा में जेलेटिन खरीदती है। अस्थमा के इलाज में काम आने वाली कुछ दवाएं कैप्सूल के जरिये ही दी जाती हैं। कंपनियों का कहना है कि कैपसूल का उपयोग आयुर्वेद ड्रग मेकर्स भी करते हैं। इंडिया में कैपसूल बनाने वाली एक बड़ी कंपनी के एक सीनियर ऐग्जिक्युटिव ने कहा, 'इस प्रतिबंध का सबसे बड़ा झटका उन लोगों को लगेगा, जो हड्डियां इकट्ठा करते हैं। हम तो जेलेटिन इंपोर्ट भी कर सकते हैं, लेकिन उनके लिए यह रोजी-रोटी का मसला है।' उन्होंने कहा कि रोटावायरस जैसी कुछ वैक्सींस और बड़े ऑपरेशन के दौरान खून का थक्का बनने से रोकने में काम आने वाली थ्रॉम्बिन को गाय के भ्रूण से तैयार किए गए सीरम से बनाया जाता है।

(IMNB)